मार्गशीर्ष मास के स्वामी हैं भगवान विष्णु, इसी मास में हुआ था शिव-पार्वती और श्रीराम-सीता का विवाह

Published : Nov 25, 2021, 09:33 AM IST
मार्गशीर्ष मास के स्वामी हैं भगवान विष्णु, इसी मास में हुआ था शिव-पार्वती और श्रीराम-सीता का विवाह

सार

इन दिनों हिंदू पंचांग का नौवां महीना मार्गशीर्ष चल रहा है, जो 19 दिसंबर तक रहेगा। इसे अगहन के नाम से भी जाना जाता है। चातुर्मास के कारण मांगलिक कार्यों पर लगी रोक इस महीने खत्म हो जाती है और विवाह आदि शुभ कार्य होने लगते हैं। इस महीने को विवाह के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है।

उज्जैन. मार्गशीर्ष मास में विवाह का अंतिम शुभ मुहूर्त 14 दिसंबर को रहेगा। इसके बाद धनु संक्रांति होने की वजह से खरमास शुरू हो जाएगा, जो मकर संक्रांति यानी अगले साल 14 जनवरी तक रहेगा। अगहन महीने में शादियों के लिए अब 9 मुहूर्त बचे हैं। इसके बाद 15 जनवरी को यानी पौष महीने में विवाह होंगे।

मार्गशीर्ष महीने में विवाह की परंपरा क्यों
पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र के अनुसार, कार्तिक महीने में भगवान विष्णु भी चार महीने की योग निद्रा से जाग जाते हैं। इसके साथ चातुर्मास खत्म होने से शुभ और मांगलिक कामों की शुरुआत की जाती है। साथ ही अगहन महीने में सनातन धर्म के दो बड़े विवाह हुए थे। इनमें भगवान शिव-पार्वती विवाह मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की द्वितीया और इसी महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी पर श्रीराम-सीता का विवाह हुआ था। मार्गशीर्ष महीने के स्वामी भगवान विष्णु है। इसलिए देव विवाह का महीना होने से इस महीने शादियों की परंपरा शुरू हुई।

मृगशिरा नक्षत्र से नाम पड़ा मार्गशीर्ष
इस पूरे महीने में काल भैरव जयंती, सूर्य ग्रहण, विवाह पंचमी, दत्तात्रेय जयंती व धनु संक्रांति समेत कुल 16 विशेष नक्षत्र व भगवत आराधना के दिन रहेंगे। जिसमें भगवान श्री कृष्ण के स्वरूप की वंदना होगी। ने बताया कि मार्गशीर्ष मास हिंदू वर्ष का 9वां महीना है, प्रत्येक चंद्रमास का नाम उसके नक्षत्र के आधार पर रखा जाता है। मार्गशीर्ष माह में मृगशिरा नक्षत्र होता है। इसलिए इसे मार्गशीर्ष कहा जाता है। आम बोलचाल की भाषा में इसे अगहन मास के नाम से भी जाना जाता है। इस माह में भगवान कृष्ण की उपासना करने का विशेष महत्व माना गया है।

मार्गशीर्ष का महत्व
गीता के एक श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण मार्गशीर्ष मास की महिमा बताते हुए कहते हैं -
बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम् ।
मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः ।।

इसका अर्थ है गायन करने योग्य श्रुतियों में मैं बृहत्साम, छंदों में गायत्री तथा मास में मार्गशीर्ष और ऋतुओं में में वसंत हूं। शास्त्रों में मार्गशीर्ष का महत्व बताते हुए कहा गया है कि वैदिक पंचांग के इस पवित्र मास में गंगा, युमना जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से रोग, दोष और पीड़ाओं से मुक्ति मिलती है।

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