शकुनि के 3 बेटों ने भी युद्ध में दिया था कौरवों का साथ, इनमें से 2 मारे गए थे, तीसरा बना गांधार का राजा

Published : Mar 19, 2022, 02:50 PM IST
शकुनि के 3 बेटों ने भी युद्ध में दिया था कौरवों का साथ, इनमें से 2 मारे गए थे, तीसरा बना गांधार का राजा

सार

महाभारत (Mahabharata) हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में से एक है। इस ग्रंथ में अनेक ऐसे पात्र है जिनके बारे में लोग कम ही जानते हैं। शकुनि (Shakuni) भी महाभारत का ऐसा ही एक पात्र है। शकुनि दुर्योधन (Duryodhana) की माता गांधारी (Gandhari) का भाई और कौरवों का मामा था।

उज्जैन. शकुनि महाभारत का सबसे बड़ा विलेन यानी खलनायक था। अगर ये कहा जाए कि कौरवों को पांडवों के खिलाफ भड़काने का काम शकुनि ने ही किया था तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। दुर्योधन की कुटिल नीतियों के पीछे शकुनि का ही हाथ था। शकुनि ने ही छल से जुएं में पांडवों को हराया। जिसके कारण पांडवों को वनवास पर जाना पड़ा। शकुनि से जुड़ी बहुत ही ऐसी बातें हैं, जिनके बारे में कम ही लोग जानते हैं। शकुनि से जुड़ी कुछ और रोचक बातें इस प्रकार हैं…

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गांधार देश का राजा था शकुनि
महाभारत के अनुसार, शकुनि के पिता का नाम राजा सुबल और माता का नाम सुदर्मा था। राजा सुबल गांधार (वर्तमान अफगानिस्तान) के राजा थे। उनकी मृत्यु के बाद शकुनि गांधार देश का राजा बना, लेकिन अपनी बहन गांधारी के विवाह के बाद वो अधिकांश समय हस्तिनापुर में ही रहा। मान्यता ये भी है कि शकुनि धृतराष्ट्र और गांधारी के विवाह के विरोध में था। लेकिन पितामाह भीष्म के आगे वो कुछ कर नहीं पाया। इसी का प्रतिशोध लेने के लिए वह हस्तिनापुर आया और कुरुक्षेत्र युद्ध का मुख्य कारण बना।

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3 पुत्र थे शकुनि के 
महाभारत के अनुसार, शकुनि की पत्नी का नाम आरशी था। इनके 3 पुत्र थे। उनके उलूक, वृकासुर और वृप्रचिट्टी था। इन तीनों ने भी कुरुक्षेत्र के युद्ध में कौरवों का साथ दिया था। युद्ध शुरू होने से पहले कौरवों की ओर से पांडवों को डराने के लिए एक संदेश भेजा गया था। ये संदेश उलूक ने ही पांड़वों को सुनाया था। उलूक का वध सहदेव ने किया था। वृकासुर का वध नकुल ने किया था, जबकि वृप्रचिट्टी युद्ध में जीवित रहा और गांधार का राजा बना।

युद्ध के अंतिम दिन हुआ था शकुनि का वध
महाभारत का युद्ध 18 दिनों तक चला था। युद्ध के अंतिम दिन सहदेव और शकुनि का भीषण युद्ध हुआ। लेकिन उसके पहले सहदेव ने उलूक का वध कर दिया, ये देख शकुनि युद्ध छोड़कर भागने लगा। सहदेव ने शकुनि का पीछा किया और पकड़ लिया। घायल होने पर भी शकुनि ने बहुत देर तक सहदेव से युद्ध किया और अंत में सहदेव के हाथों मारा गया।

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