Mahashivratri 2022: भक्तों की रक्षा के लिए धरती फाड़कर आए थे महाकाल, आज भी ज्योतिर्लिंग रूप में है स्थापित

Published : Feb 24, 2022, 11:12 AM IST
Mahashivratri 2022: भक्तों की रक्षा के लिए धरती फाड़कर आए थे महाकाल, आज भी ज्योतिर्लिंग रूप में है स्थापित

सार

इस बार 1 मार्च को महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2022) पर्व मनाया जाएगा। इस मौके पर प्रमुख शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। वैसे तो हमारे देश में अनेक शिव मंदिर हैं, लेकिन उन सभी ज्योतिर्लिंगों का विशेष महत्व है।

उज्जैन. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (Mahakal Jyotirling) से जुड़ी कई मान्यताएं और परंपराएं इसे खास बनाती हैं। 12 ज्योतिर्लिंगों (12 Jyotirlinga) में इसका स्थान तीसरा है। शिवपुराण (shiva mahapuran) के अनुसार, ये ज्योतिर्लिंग स्वयं प्रकट हुआ है। यहां भगवान महाकाल को राजा माना जाता है। सावन में प्रत्येक सोमवार को भगवान महाकाल की सवारी निकाली जाती है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से भक्त यहां आते हैं। महाकाल मंदिर 6ठी शताब्दी में निर्मित 12 ज्योतिर्लिगों में से एक है। ये मंदिर रुद्र सागर के निकट स्थापित है। 

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भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट हुए थे महाकाल
शिवपुराण के अनुसार, अवंतिका (उज्जैन) भगवान शिव को बहुत प्रिय था। यहां भगवान शिव के कई प्रिय भक्त रहते थे। एक समय अवंतिका नगरी में एक ब्राह्मण रहता था। उस ब्राह्मण के चार पुत्र थे। उस समय दूषण नाम के राक्षस ने अवंतिका में आतंक मचा दिया। वह राक्षस उस नगर के सभी वासियों को पीड़ा देना लगा। उस राक्षस के आतंक से बचने के लिए उस ब्राह्मण ने भगवान शिव की आराधना की। ब्राह्मण की तपस्या से खुश होकर भगवान शिव धरती फाड़ कर महाकाल के रूप में प्रकट हुए और उस राक्षस का वध करके नगर की रक्षा की। नगर के सभी भक्तों ने भगवान शिव से उसी स्थान पर हमेशा रहने की प्रार्थना की। भक्तों के प्रार्थना करने पर भगवान शिव अवंतिका में ही महाकाल ज्योतिर्लिंग के रूप में वहीं स्थापित हो गए।

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महाकाल ज्योतिर्लिंग की रोचक बातें
1.
ये एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। इसलिए इस ज्योतिर्लिंग का तांत्रिक महत्व भी है।
2. यहां सुबह की जाने वाली भस्मारती विश्व प्रसिद्ध है। मान्यता है कि पहले यह आरती मुर्दे की राख से की जाती थी, लेकिन कालांतर में ये प्रथा बंद हो गई।
3. मंदिर के सबसे ऊपरी तल स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर साल में सिर्फ एक दिन नागपंचमी पर खोला जाता है।
4. इस मंदिर के सभी शिखर स्वर्ण मंडित हैं यानी सभी शिखरों पर सोने की परत चढ़ी है।
5. मान्यता है कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन से अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है।

कैसे पहुंचे?
वायुमार्ग:
यहां से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर में है, जो करीब 58 किलोमीटर है। वहां से उज्जैन आसानी से पहुंचा जा सकता है।
रेलमार्ग: उज्जैन लगभग देश के सभी बड़े शहरों से रेलमार्ग से जुड़ा है। उज्जैन तक दिल्ली, मुंबई और कोलकाता से सीधी ट्रेन सेवा उपलब्ध है।
सड़क मार्ग: उज्जैन में सड़कों का अच्छा जाल बिछा है और यह देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है। नेशनल हाइवे 48 और नेशनल हाइवे 52 इसे देश के प्रमुख शहरों से जोड़ते हैं।

 

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