सिर्फ मकर संक्रांति पर खुलता है रहस्यमयी किले का ये मंदिर, दर्शन के लिए दूसरे शहर से लाते हैं मूर्ति

Published : Jan 14, 2023, 09:47 AM IST
सिर्फ मकर संक्रांति पर खुलता है रहस्यमयी किले का ये मंदिर, दर्शन के लिए दूसरे शहर से लाते हैं मूर्ति

सार

Makar Sankranti 2023: हमारे देश में ऐसे कई महल और किलें हैं जो आज भी रहस्यों से भरे हैं। ऐसा ही एक किला मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में भी है, जिसे अजयगढ़ किला कहा जाता है। इस किले में एक मंदिर है जो साल में सिर्फ एक बार बार मकर संक्रांति पर ही खुलता है।  

उज्जैन. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) का पन्ना जिला (Panna District) अजयगढ़ किले (Ajaygarh Fort ) के लिए पहचाना जाता है। ये किला हजारों साल पुराना है। इस किले में एक मंदिर भी है, जिसे अजयपाल बाबा का मंदिर (Temple of Ajaypal Baba) कहा जाता है। खास बात है ये कि ये मंदिर साल में सिर्फ एक बार मकर संक्रांति के मौक पर ही खोला जाता है। इस मौके पर यहां मेला लगता है, जिसमें हजारों भक्त बाबा अजयपाल के दर्शन के लिए यहां आते हैं। बाबा अजयपाल के बारे में कहा जाता है कि वे यहां के स्थानीय देवता हैं। 

रीवा से लाई जाती है भगवान अजयपाल की मूर्ति
भगवान अजयपाल की मूर्ति रीवा के पुरातत्व संग्रहालय में सहेजकर रखी गई है। हर साल मकर संक्रांति के मौके पर इस मूर्ति को अजयगढ़ के किले में लाया जाता है। लोग इनके दर्शन करते हैं, मन्नत मांगते हैं, माथा टेकते हैं। इसके बाद तय समय पर ये मूर्ति वापस रीवा के पुरातत्व संग्रहालय (Archaeological Museum of Rewa) में ले जाकर रख दी जाती है। ये परंपरा कई सालों से चली आ रही है। मगर किसी को नहीं पता कि ऐसा क्यों किया जाता है।

लगाते हैं इस खास चीज का भोग
दूर-दूर से भक्त मकर संक्रांति पर बाबा अजयपाल के दर्शन करने आते हैं। रात से ही लोगों की भीड़ यहां जुटने लगती है। भक्त पहले मंदिर के सामने स्थित तालाब में डुबकी लगाते हैं और फिर दर्शन करते हैं। बाबा अजयपाल को देशी घी से बनाई रोट (मोटी रोटी) चढ़ाने की परंपरा है। ऐसा कहा जाता है कि निसंतान दंपत्ति की मुराद यहां आकर जरूर पूरी होती है। माना जाता है कि यहां से कोई खाली हाथ नहीं जाता।

रहस्यों से भरा है ये किला
अजयगढ़ किला भी रहस्यों से भरा है। इस किले के बारे में कहा जाता है कि यहां चंदेल राजाओं का खजाना आज भी मौजूद है। इस खजाने के बारे में कई मान्यताए हैं। इसे खोजने के लिए कई बार कोशिश की गई लेकिन किसी को सफलता नहीं मिली। ऐसा भी कहा जाता है कि औरंगजेब जब यहां आया तो उसने खजाने का पता लगाने के लिए मंदिर में रखी मूर्ति तोड़ने की कोशिश की। लेकिन मूर्ति टूटी नहीं और कुंड में जाकर विलुप्त हो गई।

 

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