
Devi Brahmacharini Mantra: नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना का खास महत्व है। देवी का यह स्वरूप बेहद शांत और सौम्य माना जाता है। मान्यता के अनुसार, कठोर तपस्या करने के कारण ही उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। नवरात्रि के इस दिन भक्त विधि-विधान से पूजा करने के साथ देवी के मंत्रों का जाप और आरती भी करते हैं। आइए जानते हैं मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, मंत्र और 12 अक्टूबर के शुभ मुहूर्त…
सुबह 6:26 से 7:53 बजे तक
सुबह 9:19 से 10:46 बजे तक
सुबह 11:50 से दोपहर 12:36 बजे तक
दोपहर 1:40 से 3:06 बजे तक
शाम 4:33 से 6:00 बजे तक
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- मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के किसी स्वच्छ स्थान पर देवी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
- शुभ मुहूर्त में पूजा शुरू करते हुए सबसे पहले माता को तिलक लगाएं और फूलों की माला अर्पित करें।
- इसके बाद दीपक जलाकर अबीर, गुलाल, रोली, जनेऊ, सुपारी, लौंग, फूल, फल और नारियल सहित पूजा की अन्य सामग्री चढ़ाएं।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी को गन्ना अर्पित करना शुभ माना जाता है। गन्ना उपलब्ध न हो तो गुड़ या शक्कर का भोग भी लगा सकते हैं।
- पूजा के दौरान माता का ध्यान करें और अंत में श्रद्धापूर्वक आरती करें। संभव हो तो नीचे दिए गए मंत्र का 108 बार जाप करें।
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
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जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सकल संसारा।
जय गायत्री वेद की माता। जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए। कोई भी दुख सहने न पाए।
उसकी विरति रहे ठिकाने। जो तेरी महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की माला ले कर। जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।
आलस छोड़ करे गुणगाना। मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। पूर्ण करो सब मेरे काम।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी। रखना लाज मेरी महतारी।
Disclaimer
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