
कार और बाइक हर घर की बेसिक जरूरत बन गई है, दो कदम से 200 किलोमीटर तक अब ये कार-बाइक साथ निभाते हैं, यही वजह से बाजार में एक से बढ़कर हाइटेक गाड़ियां मौजूद हैं। कार खरीदें या फिर बाइक ट्यूब टायर और ट्यूबलेस टायर के बारे में सुना होगा, ऐसे में जानते हैं आखिर दोनों के बीच क्या फर्क हैं और किसी खरीदना फायदेमंद हो सकता है।
पहले की गाड़ियों में अधिकतर कंपनियां ट्यूब टायर का इस्तेमाल करती थीं लेकिन अब इनकी जगह ट्यूबलेस टायर ने ले ली है। कार से लेकर बाइक और ट्रक में ये लगे होते हैं, ट्यूब टायर में हवा टायर की जगह अंदर मौजूद एक ट्यूब में होती थी जबकि ट्यूबलेस टायर में ऐसा बिल्कुल नहीं होता है। इसमें हवा पाइप की बजाय सीधे रिंज में भरी जाती है, जिस वजह से पंचर का खतरा कम हो जाता है।
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ट्यूब टायर में गाड़ी चलते-चलते अचानक पंचर हो जाती हैं, जिस कारण हादसे का खतरा भी बढ़ जाता है जबकि ट्यूबलेस टायर में हवा निकलने के बाद भी गाड़ी चलती रहती है और ट्रैवल के दौरान किसी तरह के परेशानी नहीं होती। इन्हें टायर ट्यूब के मुकाबले रिपेयर करना भी आसान है। यही वजह है अब ज्यादातर कंपनियां सहूलियत के लिए ट्यूबलेस टायर इस्तेमाल करती हैं।
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ट्यूबलेस टायर ज्यादा बेहतर माने जाते हैं, ये पाइप वाले टायर के मुकाबले कम गर्मी पैदा करते हैं, जिस वजह से लाइफ बढ़ती है।
ये टायर्स की खासियत पर डिपेंड करता है लेकिन औसत आयु की बात करें तो ट्यूबलेस टायर्स 5 साल तक प्रभावी ढंग से काम करते हैं, इसके बाद बदलने की जरूरत होती है।
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