
ऑटोमोबाइल डेस्क: भारत में ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों की कोई कमी नहीं है। हालांकि, ट्रैफिक नियमों को तोड़ने पर उसका खामियाजा भी चालान के जरिए भुगतना पड़ता है। इस चालान को कानूनी तौर पर 2 महीने (60 दिन) के भीतर भरना पड़ता है। अगर आपके निर्धारित समय के मुताबिक चालान नहीं जमा किया, तो वर्चुअल कोर्ट तक मामला पहुंच जाता है। लेकिन अब बड़ा सवाल यह उठता है, कि मामला वर्चुअल कोर्ट ने जाने के पश्चात भी चालान नहीं भरा जाए तब क्या होगा? आईए हम इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।
अगर आपने गाड़ी चलाते समय ट्रैफिक नियमों को तोड़ा है और आपके ऊपर चालान कट चुका है, तो उसे 60 दिनों के भीतर भरना होगा। ऐसा नहीं करने पर यह मैटर वर्चुअल कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया जाता है। इसके जरिए आप घर बैठे ही चालान भर सकते हैं या फिर केस को चैलेंज कर सकते हैं। लेकिन, 90 दिनों (3 महीने) तक आपने वर्चुअल कोर्ट में भी चालान नहीं भरा, तो यह मामला काफी हद तक आगे बढ़ जाएगा। मैटर स्थानीय अदालत में ट्रांसफर किया जाता है।
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आपके ऊपर कटा चालान का मैटर जब फिजिकल कोर्ट में पहुंचता है, तब उसके बाद अदालत उस व्यक्ति के नाम पर समन भेजती है। ऐसे में एक तय हुई तारीख के दिन आपको कोर्ट में पेश होना पड़ता है। अगर इस बात को व्यक्ति सीरियसली नहीं लेकर नजरअंदाज कर देता है, तो कोर्ट उसे गैर-जमानती तक वारंट भेज देती है।
अगर ट्रैफिक का उल्लंघन करने पर कटे हुए चालान को लगातार अनदेखा किया जाए, तो संबंधित रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) उस व्यक्ति के वाहन को ब्लैकलिस्ट कर सकता है। ऐसे में गाड़ी का इंश्योरेंस रिन्यू करवाना, सेल करना या किसी दूसरे स्टेट में ट्रांसफर कराना कठिन हो जाता है। इतना ही नहीं ट्रैफिक पुलिस आपकी गाड़ी को सील भी कर सकती है।
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