
मॉर्गन स्टैनली की एक रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले कई सालों तक कंप्यूटिंग क्षमता की मांग सप्लाई से काफी ज्यादा रहने की उम्मीद है। वहीं, अमेरिका और चीन दोनों में AI नीति में हस्तक्षेप की बढ़ती संभावना वैश्विक AI बाजार के विभाजन को और गहरा कर सकती है।
हाल के हफ्तों में AI इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरों में आई भारी गिरावट पर मॉर्गन स्टैनली का मानना है कि इस कमजोरी का बड़ा कारण फंडामेंटल में गिरावट के बजाय बाजार और तकनीकी कारक हैं। रिपोर्ट में कहा गया, 'हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमारा मानना है कि कमजोरी का एक बड़ा कारण तकनीकी है, न कि फंडामेंटल।'
इसमें आगे कहा गया है कि टोकन खर्च पर एंटरप्राइज की सीमाएं AI रेवेन्यू को खास तौर पर प्रभावित नहीं करेंगी। मॉर्गन स्टैनली ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कंपनियाँ कर्मचारियों द्वारा कंप्यूटिंग संसाधनों के उपयोग पर सीमाएँ लगा सकती हैं, जैसा कि कुछ हाई-प्रोफाइल मामलों में देखा गया है। हालांकि, डेटा से पता चलता है कि यह एक महत्वपूर्ण समस्या होने की संभावना नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, एंटरप्राइज यूजर्स द्वारा औसत मासिक टोकन खर्च वर्तमान में बहुत कम है, जो 11 अमेरिकी डॉलर से भी कम है।
इसके साथ ही, AI के उपयोग का अर्थशास्त्र अत्यधिक आकर्षक बना हुआ है, क्योंकि AI टोकन पर खर्च किए गए हर 2-3 डॉलर के बदले में लगभग 55 डॉलर की श्रम लागत बचा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया, 'सबसे फायदेमंद AI क्षमताओं को अपनाने में विफल रहने वाली कंपनियों को बड़े प्रतिस्पर्धी नुकसान का सामना करना पड़ेगा, और हमें उम्मीद है कि यह स्थिति समय के साथ और स्पष्ट होती जाएगी।'
हालांकि, मॉर्गन स्टैनली ने चेतावनी दी, 'चीनी ओपन-वेट मॉडल अमेरिकी फ्रंटियर एलएलएम (लार्ज लैंग्वेज मॉडल) के लिए एक बड़ा प्रतिस्पर्धी खतरा बन सकते हैं, जिसके कारण एलएलएम को प्रशिक्षित करने के लिए कंप्यूटिंग पर कम खर्च हो सकता है।' इसमें आगे कहा गया है कि बड़े लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) और अधिक कुशल मॉडल दोनों ही अंतर्निहित एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर मजबूत रिटर्न देते हैं। इसके साथ ही, एंटरप्राइज एआई उपयोग के मामले भी अत्यधिक लागत प्रभावी हैं, जिसमें उत्पन्न लाभों के मुकाबले टोकन लागत बहुत कम होती है।
रिपोर्ट में कहा गया, 'हम अमेरिका और चीन दोनों द्वारा AI नीति में हस्तक्षेप की बढ़ती संभावना देखते हैं, जिससे वैश्विक बाजार का और अधिक विभाजन हो सकता है।'
अर्थव्यवस्था, बजट, स्टार्टअप्स, उद्योग जगत और शेयर मार्केट अपडेट्स के लिए Business News in Hindi पढ़ें। निवेश सलाह, बैंकिंग अपडेट्स और गोल्ड-सिल्वर रेट्स समेत पर्सनल फाइनेंस की जानकारी Money News in Hindi सेक्शन में पाएं। वित्तीय दुनिया की स्पष्ट और उपयोगी जानकारी — Asianet News Hindi पर।