Budget 2026 Income Tax Slabs: सैलरीड और मिडिल क्लास के लिए टैक्स में क्या बदला?

Published : Feb 01, 2026, 01:27 PM IST

Income Tax Slabs 2026: बजट 2026 में सैलरीड और मिडिल क्लास के लिए टैक्स में कई बड़े बदलाव किए हैं। TDS, TCS और टैक्स स्लैब में बदलाव, रिवाइज्ड रिटर्न फाइलिंग की तारीखें और छोटे टैक्सपेयर्स के लिए आसान नियम बनाए गए हैं। जानिए टैक्स में क्या-क्या बदला? 

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TDS और TCS में बड़े बदलाव

इस बजट में TDS और TCS की दरों में कई सुधार किए गए हैं, जिससे आपकी सैलरी पर पॉजिटिव असर पड़ेगा। विदेश में पढ़ाई या मेडिकल खर्च पर पहले 5% TCS लगता था, अब इसे घटाकर 2% कर दिया गया है। इसी तरह विदेशी टूर और पैकेज पर पहले 5% या 20% TCS था, जो अब सिर्फ 2% रहेगा। छोटे टैक्सपेयर्स को अब रूल-बेस्ड कम या निल TDS लेने का विकल्प मिलेगा और इसके लिए अधिकारी (Assessing Officer) के पास आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। इसका मतलब यह है कि आपकी जेब से पहले जितना टैक्स कटता था, वह अब कम कटेगा और खर्च का बोझ थोड़ा हल्का होगा।

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रिवाइज्ड रिटर्न की नई तारीखें

बजट 2026 में रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) की आखिरी तारीख बढ़ा दी गई है। पहले यह 31 दिसंबर थी, लेकिन अब इसे 31 मार्च तक बढ़ा दिया गया है। इससे टैक्सपेयर्स को गलती सुधारने का पर्याप्त समय मिलेगा। इंडिविजुअल्स जो ITR 1 और ITR 2 भरते हैं, उनकी आखिरी तारीख अब 31 जुलाई होगी, जबकि नॉन-ऑडिट बिजनेस या ट्रस्ट केसेस के लिए यह 31 अगस्त है। यह कदम ग्लोबल टैक्स स्टैंडर्ड के अनुसार है और गलती सुधारने की सुविधा बढ़ाता है।

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टैक्स की गलती अब अपराध नहीं?

बजट 2026 में एक और राहत की खबर आई है। कुछ छोटे टैक्स मामलों में क्रिमिनल केस का डर खत्म किया गया है। अब कागजों की छोटी चूक, कुछ तकनीकी गलतियों पर जेल नहीं जाना पड़ेगा और ना ही केस होगा, बल्कि आसान प्रॉसेस अपनाया जाएगा। इससे ईमानदार टैक्सपेयर्स को डर नहीं रहेगा और बेवजह की परेशानी कम होगी

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नया इनकम टैक्स एक्ट 2025

सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की व्यापक समीक्षा के बाद नया Income Tax Act 2025 पेश किया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। नए कानून में टैक्स स्लैब वही हैं, लेकिन नियमों को आसान और समझने योग्य बनाया गया है। अब टैक्स की भाषा सरल हो गई है और compliance के प्रोसेस भी आसान हुए हैं। इससे आम आदमी को टैक्स भरने में सुविधा मिलेगी और गलती करने का डर कम होगा।

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सेक्शन 80C और सेविंग

बजट 2026 ने सेक्शन 80C को बचत बढ़ाने के लिए रखा है। EPF, NPS, PPF जैसे लॉन्ग टर्म की बचत पर लिमिटेड डिडक्शन अभी भी उपलब्ध है। गवर्नमेंट डेटा का इस्तेमाल करके ऑटो ट्रैक्टड इंसेंटिव्स (Auto-Tracked Incentives) दिए जाएंगे। इसका मतलब यह है कि आप बिना किसी जटिलता के अपनी बचत बढ़ा सकते हैं और टैक्स में राहत भी पा सकते हैं।

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इलेक्ट्रिक वेहिकल्स और नए प्रावधान

कई कंपनियां अब कर्मचारियों को इलेक्ट्रिक कार दे रही हैं। लेकिन EV पर टैक्स कैसे लगेगा, इस पर अभी साफ नियम नहीं हैं। इससे कर्मचारियों और कंपनियों दोनों में कन्फ्यूजन है। आने वाले समय में सरकार इस पर अलग नियम ला सकती है। इसका असर यह होगा कि कर्मचारियों को EV का परक्विजिट वैल्यूएशन (Perquisite Valuation) करने में मदद मिलेगी और एम्प्लॉइज को पता चलेगा कि उनकी सैलरी में कितना टैक्स कटेगा।

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क्रॉस बॉर्डर और ESOP टैक्स

अगर आप विदेश में काम कर रहे हैं या ESOP (Employee Stock Option Plans) पा रहे हैं, तो आपके लिए थोड़ी सावधानी जरूरी है। बजट 2026 ने डोमेस्टिग एम्प्लॉइज के लिए नियम स्पष्ट किए हैं, लेकिन क्रॉस-बॉर्डर एम्प्लॉइज के लिए अभी कुछ अस्पष्टताएं हैं। इससे कभी-कभी मुकदमेबाजी या असंगत असेसमेंट हो सकता है। इसका असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा जो विदेश में या एक से ज्यादा सेक्टर के असाइमेंट्स कर रहे हैं।

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