ईरान संकट के बावजूद सोने-चांदी की कीमतें गिर रही हैं, जो सामान्य धारणा के विपरीत है। आमतौर पर जंग में दाम बढ़ते हैं। इसका मुख्य कारण मजबूत यूएस डॉलर इंडेक्स है, जिसने सोने की वैश्विक मांग को कम कर दिया है।
ईरान इस समय अमेरिका और इजरायल की तरफ से लगातार हमलों का सामना कर रहा है। जवाब में ईरान भी खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला कर अपनी ताकत दिखा रहा है। इस जंग को शुरू हुए करीब 12 दिन हो चुके हैं। लेकिन एक बात हैरान करने वाली है। आमतौर पर जब भी दुनिया में ऐसा कोई बड़ा संकट आता है, तो सोने-चांदी के दाम आसमान छूने लगते हैं। पर इस बार ईरान संकट के दौरान बाजार का बर्ताव काफी अजीब है।
तनाव के बीच क्यों सस्ता हो रहा सोना-चांदी?
आमतौर पर जब भी दुनिया में राजनीतिक तनाव या बड़ी जंग होती है, तो निवेशक शेयर बाजार के जोखिम से बचने के लिए सोने में पैसा लगाते हैं। सोने को 'सेफ हेवन' यानी एक सुरक्षित निवेश माना जाता है। इससे सोने की मांग बढ़ती है और कीमतें भी। लेकिन मौजूदा हालात में, जंग की टेंशन बढ़ने के बावजूद सोने-चांदी के दाम बढ़ने की बजाय गिर रहे हैं, जो सबके लिए हैरानी की बात है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या है सोने का हाल?
28 फरवरी को जब ईरान में यह संकट शुरू हुआ, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 5,416 डॉलर प्रति औंस थी। लेकिन मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के कोई संकेत न मिलने के बावजूद, कीमत गिरकर 5,108 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। यानी, इस अनिश्चितता के बीच भी पीली धातु अपनी चमक खो रही है।
भारतीय बाजार में भी गिरे सोने-चांदी के दाम!
भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है। 28 फरवरी को 10 ग्राम सोने का भाव करीब 1.67 लाख रुपये था, जो अब घटकर 1.59 लाख रुपये पर आ गया है। सिर्फ सोना ही नहीं, चांदी की कीमतों में भी गिरावट आई है। 28 फरवरी को एक किलो चांदी का भाव 2.89 लाख रुपये था, जो 13 मार्च तक गिरकर 2.62 लाख रुपये हो गया। इससे निवेशकों में कन्फ्यूजन है।
कीमतें गिरने की असली वजह क्या है?
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जंग के बावजूद सोने की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह 'यूएस डॉलर इंडेक्स' का मजबूत होना है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की वैल्यू बढ़ती है, तो दूसरी करेंसी इस्तेमाल करने वाले देशों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इसी वजह से दुनिया भर में सोने-चांदी की मांग में अस्थायी रूप से कमी आई है, जिससे कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है।


