
नई दिल्ली. जून 2016 के बाद भारत का बिजेनस सेंटीमेंट अबतक के निचले स्तर पर पहुंच गया। इसकी वजह धीमी होती अर्थव्यवस्था और सरकार की पॉलिसी, पानी की किल्लत जैसी समस्या है। आईएचएस मार्केट सर्वे ने रिपोर्ट जारी करते हुए इसकी जानकारी दी है।
सर्वे के मुताबिक, जून में प्राइवेट कंपनियों की आउटपुट ग्रोथ घट गई। इस साल ग्रोथ 15 परसेंट रही। वहीं फरवरी में यही आंकड़ा, 18 परसेंट था। इससे पहले 2016 में आउटपुट ग्रोथ इसी स्तर पर थी। इसके अलावा, देश में इस साल भी बारिश कम होने के अनुमान है। कंपनियां डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आने वाली गिरावट का भी अनुमान लगा रही है। जिस वजह से इंपोर्टेड वस्तुओं की कीमतों में इजाफा होगा, साथ टैक्स में बढ़ोत्तरी और फाइनेंशियल दिक्कतें भी आ सकती है।
बेहतर आउटपुट की थी उम्मीद
बिजनेस के लिए बनाई सरकार की पॉलिसी और फाइनेंशियल कंडिशन की उम्मीद में एक साल में बेहतर आउटपुट और प्रॉफिटेबिलिटी ग्रोथ के अच्छे रहने का अनुमान था। जिसकी वजह से कंपनी ने एक्सट्रा वर्क फोर्स बढ़ाने पर काम किया। लेकिन किये गए खर्च के हिसाब से सेंटीमेंट कमजोर रहा। भारत में कैपिटल इन्वेस्टमेंट कॉन्फिडेंस वैसे ही कमजोर है।
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