
नई दिल्लीः रूस-यूक्रेन युद्ध और कोरोना के कारण देश-दुनिया के हालात कैसे रहे, इसका पता आज चल जाएगा। दरअसल नेशनल स्टैस्टिकल ऑफिस (National Statistical Office) आज जीडीपी (GDP) के मार्च तिमाही के आंकड़े जारी करेगा। ये आंकड़े आरबीआई (RBI) की मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग से एक हफ्ते पहले आ रहे हैं। यह मीटिंग छह जून से शुरू होनी है। रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) और साथ ही कमोडिटी की कीमतों (commodities price) में तेजी से महंगाई रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। इस कारण जीडीपी के पहले के अनुमानों में कटौती की गई है। आज आने वाले जीडीपी के आंकड़ों से देश की मैक्रोइकोनॉमिक स्थिति के बारे में चीजें साफ होंगी और यह इशारा भी मिलेगा कि इकोनॉमी किस ओर जा रही है।
कोरोना का कितना पड़ा असर
देश में कोरोना की तीसरी लहर जनवरी के अंत में पीक पर पहुंची थी। कोरोना के Omicron वैरिएंट ने दूसरी लहर की तरह कहर नहीं ढाया लेकिन इससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। एनएनओ ने जब फरवरी में जीडीपी का दूसरा एडवांस एस्टीमेट जारी किया था तो 2021-22 में जीडीपी ग्रोथ के 8.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था। यानी चौथी तिमाही में यह 4.8 फीसदी रह सकती है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक इकनॉमिस्ट्स ने मार्च तिमाही में ग्रोथ के 3.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। वित्त वर्ष 2021-22 में इसके 8.8% रहने का अनुमान है।
क्या इशारा दे रहा है पीएमआई
परचेजिंग मैनेजर्स इंडाइसेज (PMI) जैसे इंडिकेटर्स इशारा दे रहे हैं कि देश में कोरोना की तीसरी लहर का आर्थिक गतिविधियों पर मामूली असर रहा। जनवरी से मार्च के बीच मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज का पीएमआई 50 की मनोवैज्ञानिक सीमा से नीचे नहीं गए। अगर यह 50 से नीचे रहता है तो इसका मतलब है कि इकनॉमिक एक्टिविटी में पिछले महीने के मुकाबले गिरावट आई है। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज के पीएमआई वैल्यू के मुताबिक इस दौरान इकनॉमिक मूमेंटम में लगातार तेजी बनी रही। इससे साफ है कि कोरोना की तीसरी लहर का फॉर्मल सेक्टर की गतिविधियों पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।
आईआईपी के आंकड़े
मार्च तिमाही के इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रॉडक्शन (IIP) के आंकड़ों के मुताबिक कम से कम मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में चीजें पीएमआई नंबर की तरह उत्साह बढ़ाने वाली नहीं हैं। सालाना आधार पर मार्च तिमाही में आईआईपी का मैन्युफैक्चरिंग कंपोनेट सिर्फ 0.95 फीसदी बढ़ा। ओवरऑल आईआईपी में मैन्युफैक्चरिंग कंपोनेट का वेट 77 फीसदी है। इससे पहले 2020-21 में देश की जीडीपी में 7.3 फीसदी की गिरावट आई थी। 2019-20 में यह चार फीसदी की दर से बढ़ी थी। ऐसे में पिछले तीन सालों में इस बार सबसे ज्यादा विकास दर रहने की उम्मीद है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का अनुमान एनएसओ से कम है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने अप्रैल की अपनी नीतिगत बैठक में कहा था कि देश की इकॉनमी 7.2 फीसदी की दर से बढ़ सकती है। पहले का अनुमान 7.8 फीसदी का था। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने भी 2021-22 में जीडीपी ग्रोथ 8.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। एनएसओ का अनुमान सभी एजेंसियों के अनुमान से मेल खाता है। लेकिन आरबीआई का अनुमान सबसे कम है।
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