
बिजनेस डेस्क। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के शीर्ष निर्णय लेने वाली संस्था सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) ने गुरुवार को श्रीनगर में हुई अपनी बैठक में 2020-21 के लिए ब्याज दर 8.5 प्रतिशत तय करने का फैसला किया है। इस तरह की अटकलें थीं कि ईपीएफओ वित्त वर्ष 2020-21 के लिए भविष्य निधि जमा पर ब्याज 2019-20 में दिए गए 8.5 प्रतिशत से कम करेगा। इसके पीछे कोरोनोवायरस महामारी को वजह बताया जा रहा था। कोरोना महामारी के दौर में पीएफ से ज्यादा निकासी हुई और कॉन्ट्रिब्यूशन कम हुआ।
7 फीसदी कम की गई थी ब्याज दर
पिछले साल मार्च में ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर को घटाकर 7 फीसदी से कम कर 8.5 फीसदी कर दिया था। यह 2012-13 के बाद बाद से सबसे कम ब्याज दर थी।
पहले क्या थी ब्याज दर
ईपीएफओ ने 2016-17 में अपने मेंबर्स को 8.65 फी,दी ब्याज दर दी थी। 2017-18 में यह 8.55 फीसदी यानी 2015-16 के ब्याज दर 8.8 फीसदी से थोड़ी ज्यादा थी। 2013-14 के साथ-साथ 2014-15 में 8.75 फीसदी की ब्याज दर थी, जो 2012-13 के 8.5 प्रतिशत से ज्यादा थी। ईपीएफओ ने 2011-12 में भविष्य निधि पर ब्याज दर 8.25 प्रतिशत दी थी।
इतने लोग हैं पीएफ के दायरे में
बता दें कि देश में कुल 6 करोड़ से ज्यादा लोग पीएफ (PF) के दायरे में हैं। जिन कंपनियों में 20 से ज्यादा लोग काम करते हैं, वहां पीएफ लागू करना अनिवार्य होता है। दिसंबर तिमाही के आंकड़ों के मुताबिक, कुल 8.40 लाख नए मेंबर ईपीएफओ से जुड़े थे। वहीं, इस दौरान 29.47 लाख मेंबर इससे निकल गए, लेकिन बाद में 7.44 लाख मेंबर फिर से इससे जुड़ गए थे।
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