
EPFO Big Update: अगर आप किसी प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं और हर महीने अपनी सैलरी स्लिप देखकर सोचते हैं कि काश हाथ में थोड़े और पैसे आते, तो आपके लिए बड़ी खुशखबरी है। EPFO ने पीएफ (Provident Fund) के नियमों में एक ऐसा बदलाव किया है, जिससे न सिर्फ आपकी हर महीने बैंक खाते में आने वाली सैलरी (In-Hand Salary) बढ़ सकती है, बल्कि जरूरत पड़ने पर आप अपने पीएफ का पूरा का पूरा पैसा भी निकाल पाएंगे। लेकिन इस पूरे फायदे को उठाने के लिए आपको ईपीएफओ की एक छोटी सी शर्त माननी होगी। आइए जानते हैं इस बदलाव के बारें में और इससे आपकी जेब पर क्या असर पड़ने वाला है...
अब तक नियम यह था कि आपकी बेसिक सैलरी का एक बड़ा हिस्सा पीएफ में कट जाता था, लेकिन नए नियमों के तहत अब सरकार ने एक लिमिट तय कर दी है। अब जरूरी पीएफ योगदान के लिए सैलरी की लिमिट ₹15,000 मंथली तय की गई है। इसका मतलब है कि आपकी बेसिक सैलरी चाहे ₹50,000 हो या ₹1 लाख, आपके पीएफ अकाउंट के लिए अनिवार्य रूप से सिर्फ 12% यानी मैक्सिमम ₹1,800 ही काटे जाएंगे। इतना ही पैसा आपकी कंपनी भी मिलाएगी। अगर आप ₹1,800 से ज्यादा पैसा अपने पीएफ में कटवाना चाहते हैं, तो यह पूरी तरह आपकी मर्जी (Voluntary) पर निर्भर करेगा। कंपनी आप पर दबाव नहीं डाल सकती। चूंकि पीएफ में कम पैसा कटेगा, इसलिए हर महीने आपके हाथ में आने वाली सैलरी बढ़ जाएगी।
अक्सर लोग शिकायत करते थे कि पीएफ से एडवांस पैसा निकालने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं और नियम इतने पेचीदा हैं कि समझ ही नहीं आते। ईपीएफओ ने इस मुश्किल को भी हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। पहले पैसा निकालने के लिए 13 अलग-अलग नियम और कैटेगरीज हुआ करती थीं, जिन्हें घटाकर अब सिर्फ 3 आसान कैटेगरी कर दिया गया है। इसके अलावा, अब आप साल में पहले से ज्यादा बार पैसा निकाल सकते हैं और इसके लिए फॉर्म भरने की प्रक्रिया को भी बेहद सिंपल बना दिया गया है।
1. जरूरी जरूरतें जैसे बीमारी का इलाज, बच्चों की पढ़ाई या शादी।
2. घर से जुड़ी जरूरतें जैसे घर खरीदना या मरम्मत करवाना।
3. किसी तरह की इमरजेंसी
नए नियमों के मुताबिक, अब आप अपनी जरूरत के समय अपने पीएफ अकाउंट में जमा कुल रकम (यानी आपका हिस्सा और कंपनी का हिस्सा दोनों मिलाकर) का पूरा 100% एडवांस निकाल सकते हैं। लेकिन इसके लिए ईपीएफओ ने जो एक जरूरी शर्त रखी है, जो यह है कि आप पूरा पैसा तो निकाल सकते हैं, लेकिन आपको अपने पीएफ अकाउंट में अपने कुल योगदान का कम से कम 25% हिस्सा 'मिनिमम बैलेंस' के तौर पर हमेशा बनाए रखना होगा। यानी आप अकाउंट को पूरी तरह खाली (Zero) नहीं कर सकते हैं।
अगर आप किसी ठेकेदार (Contractor) के जरिए किसी कंपनी में काम करते हैं, तो नए नियम आपके लिए भी बड़ी राहत लेकर आए हैं। अब अगर ठेकेदार आपका पीएफ नहीं जमा करता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी उस मुख्य कंपनी (Principal Employer) की होगी जहां आप ड्यूटी कर रहे हैं। कंपनियों को अब हर महीने अपने सभी कर्मचारियों का पूरा ब्यौरा (जैसे UAN, पैन या अन्य) सरकार को देना अनिवार्य कर दिया गया है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। EPFO से जुड़े नियम, पात्रता, PF निकासी की शर्तें और सैलरी संरचना का प्रभाव हर कर्मचारी और कंपनी के लिए अलग हो सकता है। किसी भी वित्तीय या रोजगार संबंधी निर्णय से पहले EPFO की आधिकारिक गाइडलाइंस, अपने नियोक्ता या संबंधित विशेषज्ञ से जानकारी जरूर लें।
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