
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों में स्थानीय लोगों को मौका नहीं दिए जाने पर चिंता जताई है। सीतारमण ने बैंकों को अपने ब्रांच पर स्थानीय लोगों को नियुक्त करने की भी सलाह दी है। उन्होंने कहा कि बैंक अगर स्थानीय भाषा बोलने वाले को प्राथमिकता देंगे तो लोकल लोगों को बैंकिंग के लिए आने में सुविधा हो सकेगी।
इंडियन बैंक्स एसोसिएशन की 75वीं वार्षिक मीटिंग
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मुंबई में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन की 75वीं वार्षिक मीटिंग को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि बैंकों को अपनी भर्ती को समावेशी बनाना चाहिए। ऐसे युवाओं को प्राथमिकता देना होगा जो स्थानीय भाषा को जानते हैं। इससे बैंकिंग फ्रेंडली प्रणाली विकसित होगी।
बैंकों करना होगा पहल ताकि लोकल को मिले मौका
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आप व्यवसाय करने के लिए हैं। आप नागरिकों में मूल्य प्रणाली विकसित करने के लिए नहीं हैं। हमारा देश विविधता वाला है। इसको देखते हुए बैंक्स को स्थानीयता पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब आपके पास शाखा स्तर पर कर्मचारी हैं जो क्षेत्रीय भाषा में बात नहीं करते हैं तो इससे लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। सीतारमण ने कहा कि आप ऐसे कर्मचारी को नियुक्त करें जो स्थानीय लोगों को उनकी ही भाषा में बात करने में सक्षम हो। बैंकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे कर्मचारियों को पब्लिक डीलिंग में न लगाए जो हिंदी या उनकी लोकल भाषा न जानता हो।
बैंक्स को पीपुल्स फ्रेंडली होने की जरूरत
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि बैंकों को अपने ग्राहकों के साथ पॉजिटिव व्यवहार करना चाहिए। जब कोई ग्राहक बैंक में प्रवेश करे तो आपका व्यवहार उसे बार-बार वहां आने के लिए प्रेरित करे। आप कहीं भी अपना ब्रांच खोलते हैं तो वहां बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए जाते हैं। बिजनेस करने के लिए लोगों का आप पर भरोसा होना चाहिए, व्यवहार से लोगों में सकारात्मक संदेश जाए।
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