अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल के बाद सेंसेक्स और निफ्टी 2% से ज्यादा गिर गए। निवेशकों में चिंता बढ़ी।
Why Share Market is Down Today: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़े सैन्य तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। कारोबार के दौरान अचानक हुई भारी बिकवाली के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक 2% से ज्यादा टूट गए। सेंसेक्स जहां 1677 प्वाइंट की गिरावट के साथ 76503 पर बंद हुआ, वहीं निफ्टी भी 516 अंक लुढ़क कर 23882 पर क्लोज हुआ। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और महंगे कच्चे तेल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसके कारण बाजार में दबाव देखने को मिला। जानते हैं आखिर क्या रहीं बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहें।

अमेरिका-ईरान तनाव से निवेशकों की बढ़ी चिंता
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा सैन्य तनाव रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ठिकानों पर जवाबी सैन्य कार्रवाई के बाद पहले लागू अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) को खत्म बताया। इस घटनाक्रम ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी और निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ।
कच्चे तेल की कीमतों में आया तेज उछाल
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर कच्चे तेल के बाजार पर भी देखने को मिला। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है।
महंगे कच्चे तेल का अर्थव्यवस्था पर असर
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए चिंता का विषय मानी जाती है। तेल महंगा होने से देश का इंपोर्ट बिल बढ़ता है और करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) पर दबाव आता है। इसके साथ ही महंगाई बढ़ने की आशंका भी तेज हो जाती है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाकर अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करने लगते हैं, जिसका असर शेयर बाजार पर दिखाई देता है।
कमजोर ग्लोबल संकेतों से बढ़ा बिकवाली का दबाव
मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव का असर सिर्फ भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रहा। वैश्विक बाजारों में भी निवेशकों का सेंटीमेंट कमजोर हुआ। इसके चलते कई सेक्टरों में बड़े पैमाने पर बिकवाली और प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिली। कमजोर अंतरराष्ट्रीय संकेतों और बढ़ती अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिससे बाजार में गिरावट और गहरी हो गई।
बाजार पर आगे भी रहेगी नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक वैश्विक और भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों की नजर अब भू-राजनीतिक घटनाक्रम, तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर रहेगी।


