Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट से निवेशकों के करीब 9 लाख करोड़ रुपये डूब गए। सेंसेक्स 1700 अंक से ज्यादा टूटा और निफ्टी 24,000 के नीचे फिसल गया। जानिए ट्रंप के बयान, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों ने कैसे बढ़ाया दबाव।
Sensex Crash Today: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी बिकवाली ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया। कुछ ही घंटों के कारोबार में निवेशकों की करीब 9 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति घट गई। सेंसेक्स 1,700 अंक से ज्यादा लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 24,000 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार में इस बड़ी गिरावट के पीछे सिर्फ घरेलू कारण नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत भी जिम्मेदार रहे।

सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट, सभी सेक्टर दबाव में
दोपहर करीब 2 बजे सेंसेक्स 1,700 अंक से ज्यादा टूटकर 76,472.78 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी50 में 438 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर करीब 471 लाख करोड़ रुपये रह गया।
हिंदुस्तान यूनिलीवर, इंटरग्लोब एविएशन, मारुति सुजुकी, कोटक महिंद्रा बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और भारती एयरटेल जैसे बड़े शेयरों में 2 से 4 फीसदी तक गिरावट रही। वहीं निफ्टी बैंक, FMCG और ऑयल एंड गैस इंडेक्स भी 2 फीसदी से अधिक टूट गए।
आखिर शेयर बाजार क्यों टूटा? समझिए 5 बड़े कारण
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को लेकर दिया गया बयान माना जा रहा है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ हुआ अंतरिम सीजफायर समझौता खत्म हो गया है, जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने की आशंका गहरा गई।
तनाव बढ़ने के साथ ही ब्रेंट क्रूड करीब 5 फीसदी चढ़कर 78 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। होर्मुज स्ट्रेट के जरिए तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी। इसके अलावा यूरोप, एशिया और अमेरिका के बाजारों से मिले कमजोर संकेत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया।
अब निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और रुपये की चाल पर बाजार की दिशा निर्भर करेगी। ऐसे समय में घबराकर फैसले लेने के बजाय निवेशकों को लंबी अवधि की रणनीति अपनानी चाहिए और वैश्विक घटनाक्रम पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
अगर भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है, तो बाजार में उतार-चढ़ाव कुछ समय तक जारी रह सकता है। वहीं हालात सामान्य होने पर बाजार में रिकवरी की संभावना भी बनी रहेगी।


