डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ अस्थायी युद्धविराम खत्म होने के बयान के बाद कच्चे तेल की कीमतें 6% से ज्यादा बढ़ीं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में फिर तनाव बढ़ गया। 

Trump-Iran Tension: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यह कहने के बाद कि ईरान के साथ अस्थायी युद्धविराम अब खत्म हो गया है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। इस बयान के बाद दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादक क्षेत्रों में से एक मिडिल-ईस्ट में फिर से तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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ब्रेंट और WTI क्रूड में 6% से ज्यादा की तेजी

लंदन में कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में 6% से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमतों में भी तेज उछाल आया। ट्रंप ने अंकारा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि वह अब ईरान के साथ किसी नए समझौते के पक्ष में नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उनकी ओर से बातचीत करने वाली टीम ईरान के साथ बातचीत जारी रखेगी, लेकिन उनके अनुसार यह कोशिश शायद अब समय की बर्बादी साबित होगी।

गोल्ड और सिल्वर ETF में आई गिरावट

तेल की कीमतों में तेजी के बीच कीमती धातुओं के बाजार में दबाव देखने को मिला। गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में गिरावट के चलते इनसे जुड़े ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) में करीब 3% तक की गिरावट दर्ज की गई।

ब्रेंट क्रूड पहुंचा 78.56 डॉलर प्रति बैरल

ICE ब्रेंट क्रूड ऑयल सितंबर फ्यूचर्स की कीमत बढ़कर 78.56 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इस तेजी ने पहले से संवेदनशील बने वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बार फिर अस्थिरता की आशंका बढ़ा दी है। इससे पहले दूसरी तिमाही के दौरान क्षेत्रीय तनाव कम होने की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में अच्छी-खासी गिरावट आई थी। अब हालात बदलने से बाजार की दिशा फिर बदलती नजर आ रही है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी चिंता

मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर चर्चा में है। यह समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी के तेल उत्पादक देशों को दुनिया के बाकी बाजारों से जोड़ता है। अगर क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो जहाज मालिकों और तेल उत्पादक देशों के लिए इस रास्ते से तेल की सप्लाई जारी रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

बाजार की उम्मीदों के विपरीत आई तेजी

यह उछाल ऐसे समय में आया है जब बाजार के कई विशेषज्ञ तेल की कीमतों में नरमी की उम्मीद कर रहे थे। कई सट्टेबाजों ने ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में बड़ी संख्या में शॉर्ट पोजीशन ले रखी थी, यानी वे कीमतों में गिरावट पर दांव लगा रहे थे। हाल के हफ्तों में होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा सामान्य रूप से खुलने के बाद निवेशकों ने कीमतों में बढ़ोतरी की अपनी नेट-बुलिश पोजीशन भी तेजी से कम कर दी थी। यह कमी 2020 की कोरोना महामारी के बाद सबसे तेज़ मानी जा रही थी। ऐसे माहौल में ट्रंप के बयान के बाद तेल बाजार में अचानक आई तेजी ने निवेशकों और ऊर्जा बाजार की चिंताओं को फिर बढ़ा दिया।

सेंसेक्स में 1800 प्वाइंट से ज्यादा की गिरावट

अमेरिका-ईरान में एक बार फिर जंग छिड़ती देख शेयर बाजार बुधवार को धराशायी हो गया। ट्रंप के बयान के बाद बीएसई सेंसेक्स दोपहर 3 बजे 1887 प्वाइंट टूटकर 76292 अंकों पर आ गया। वहीं, निफ्टी भी 576 अंकों की गिरावट के साथ 23822 के आसपास कारोबार कर रहा है।