लोकसभा में 'गोमूत्र विशेषज्ञ' टिप्पणी से सियासी भूचाल आ गया। प्रियंका गांधी के बयान पर अनुराग ठाकुर ने पलटवार किया। आखिर IIT प्रोफेसर को लेकर क्यों छिड़ी इतनी बड़ी बहस?

Parliament Monsoon Session: नई दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में आज उस वक्त भूचाल आ गया, जब संसद के मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक अप्रत्याशित जंग छिड़ गई। 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चल रही गंभीर बहस अचानक एक बेहद व्यक्तिगत और तीखे विवाद में बदल गई। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और पेपर लीक संकट को लेकर सरकार को घेरते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने एक ऐसी टिप्पणी कर दी, जिसने सदन के भीतर का तापमान अचानक बढ़ा दिया। यह बहस सिर्फ नीतियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें एक जाने-माने संस्थान के प्रमुख और भारतीय संस्कृति से जुड़े एक संवेदनशील विषय का तड़का लग गया।

वह रहस्यमयी टिप्पणी: आखिर कौन है वह 'गोमूत्र विशेषज्ञ'?

सदन को संबोधित करते हुए प्रियंका गांधी ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बनाई "उच्च-स्तरीय" टास्क फोर्स पर सवाल उठाए। परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए बनाई गई इस समिति पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, "नई समितियां बनाने से काम नहीं चलेगा। इस नई समिति में एक पूर्व IB प्रमुख, एक IT कंपनी के मालिक और एक 'गोमूत्र' विशेषज्ञ भी शामिल हैं।" हालांकि प्रियंका गांधी ने अपने पूरे भाषण में किसी भी व्यक्ति का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन सदन में मौजूद हर शख्स और राजनीतिक विश्लेषकों को यह समझने में देर नहीं लगी कि यह तीखा तीर किसकी तरफ चलाया गया था। यह इशारा सीधे तौर पर देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक, IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटी की तरफ था।

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कौन हैं प्रोफेसर वी. कामाकोटी और क्यों हो रहा है उनका जिक्र?

प्रोफेसर वी. कामाकोटी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स के छह विशेषज्ञों में शामिल हैं। इस समिति का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित और पेपर लीक जैसी घटनाओं से मुक्त बनाने के लिए सुधारों की सिफारिश करना है। उनका नाम पहले भी चर्चा में रहा था, जब उन्होंने जनवरी 2025 में गोमूत्र के संभावित औषधीय गुणों पर टिप्पणी की थी। उन्होंने दावा किया था कि कुछ शोधों में गोमूत्र में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुणों का उल्लेख किया गया है। बाद में यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और इसे लेकर तीखी बहस छिड़ गई।

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वैज्ञानिक सच या महज़ अंधविश्वास: प्रोफेसर कामाकोटी का वह वायरल वीडियो

आखिर एक IIT प्रोफेसर को 'गोमूत्र विशेषज्ञ' क्यों कहा गया? इसके पीछे की कहानी जनवरी 2025 में छिपी है। चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर कामाकोटी ने दावा किया था कि गोमूत्र में एंटी-फंगल, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। उनका यह भाषण सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया था, जिसके बाद आलोचकों ने उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर सवाल उठाए थे। हालांकि, प्रोफेसर कामाकोटी ने अपने बचाव में 'नेचर' (Nature) जैसे विश्व प्रसिद्ध पीयर-रिव्यूड जर्नल में पब्लिश हुए करनाल के ICAR-नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक रिसर्च पेपर्स का हवाला दिया था। लेकिन राजनीति को तो बस एक मौके की तलाश थी, जो आज संसद में प्रियंका गांधी के बयान के रूप में सामने आ गया।

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अनुराग ठाकुर का प्रचंड पलटवार: "शायद भाई-बहन एक जैसा ही कुछ खा-पी रहे हैं..."

प्रियंका गांधी के इस हमले पर बीजेपी के दिग्गज नेता और सांसद अनुराग ठाकुर ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने सदन में प्रियंका गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह गंभीर मुद्दों पर हल्की मुस्कान देकर देश को गुमराह करने की कोशिश कर रही हैं। अनुराग ठाकुर ने प्रोफेसर कामाकोटी का बचाव करते हुए कहा, "मुझे दुख है कि उन्होंने भारत के महान वैज्ञानिकों में से एक, IIT मद्रास के प्रोफेसर का अपमान किया। अगर वह RSS से जुड़े हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। आपको भी RSS से जुड़ना चाहिए, ताकि आप कुछ संस्कार सीख सकें।" बात यहीं नहीं रुकी, ठाकुर ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर तीखा तंज कसते हुए आगे कहा, "मुझे लगता है कि भाई-बहन एक जैसे ही हैं। वे कुछ ऐसा खा-पी रहे हैं जिससे उनके दिमाग पर असर पड़ रहा है। शायद उन्हें गाय का मूत्र पीना चाहिए।"

आगे क्या? परीक्षा प्रणाली के पीछे छिपा असली सियासी खेल

इस तीखी नोकझोंक ने यह साफ कर दिया है कि 2026 का मानसून सत्र केवल बिल पास कराने तक सीमित नहीं रहने वाला है। विपक्ष जहां NTA और पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को पूरी तरह घेरने और उसकी समितियों की साख पर सवाल उठाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है, वहीं सरकार भी बैकफुट पर आने के मूड में नहीं है। 'गोमूत्र' और 'संस्कार' के इर्द-गिर्द बुनी गई यह बहस आने वाले दिनों में देश की राजनीति और सोशल मीडिया पर एक नया मोड़ लेने वाली है। देखना यह होगा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर बिल पर आगे क्या मोड़ आता है!

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