ट्रंप ने ईरान के साथ सीज़फायर खत्म घोषित कर 80 ठिकानों पर अमेरिकी हमलों का ऐलान किया। NATO समिट के बीच बढ़े तनाव से तेल बाज़ार उछला और दुनिया में युद्ध की आशंका गहरा गई।
Trump Iran Ceasefire: तुर्किये की राजधानी अंकारा में चल रहे नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन में उस वक्त सन्नाटा पसर गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद सनसनीखेज और खतरनाक ऐलान कर दिया। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल टैंकरों पर हुए लगातार हमलों से भड़के ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे नाजुक युद्धविराम (Ceasefire) को पूरी तरह से खत्म घोषित कर दिया है। नाटो महासचिव मार्क रुटे के बगल में बैठे ट्रंप ने बेहद तल्ख लहजे में पत्रकारों से कहा, "मेरे हिसाब से यह समझौता अब पूरी तरह खत्म हो चुका है और मैं अब उनसे कोई बातचीत नहीं करना चाहता।" ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व को 'बुरे और बीमार लोग' बताते हुए उसकी तुलना एक ऐसे 'कैंसर' से कर दी जिसे तुरंत काटकर शरीर से अलग करने की ज़रूरत है। महज कुछ हफ्ते पहले 17 जून को हुए जिस इस्लामाबाद शांति समझौते (MoU) से दुनिया ने राहत की सांस ली थी, वह अब इतिहास के मलबे में दफन हो चुका है।

रात भर बरसता रहा अमेरिकी बारूद…80 से ज्यादा ठिकाने तबाह, तेल की बिक्री पर पूर्ण नाकेबंदी
ट्रंप के इस गुस्से के पीछे सोमवार रात को शुरू हुआ अमेरिकी सेना का वो गुप्त और विनाशकारी सैन्य ऑपरेशन है, जिसने ईरान को हिलाकर रख दिया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि वाशिंगटन ने ईरान के भीतर 80 से ज्यादा रणनीतिक ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए हैं। इस ऑपरेशन में ईरान के एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय रडार साइटों और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की 60 से अधिक छोटी लड़ाकू नावों को मलबे में तब्दील कर दिया गया। इस हमले से ठीक पहले अमेरिकी ट्रेजरी ने ईरान के तेल बेचने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था, जो कि पूर्व समझौते की सबसे अहम शर्त थी। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि अब बातचीत का समय खत्म हो चुका है और कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
"उनकी हिट लिस्ट में नंबर वन हूं मैं!" ट्रंप का वो दावा जिसने खुफिया एजेंसियों को चौंकाया
नाटो समिट के गलियारों में सस्पेंस तब और गहरा गया जब ट्रंप ने अपनी जान को लेकर एक बहुत बड़ा और खौफनाक दावा किया। ट्रंप ने पत्रकारों के सामने खुलासा किया कि वे इस वक्त ईरानी हुकूमत की 'हिट लिस्ट' में सबसे ऊपर यानी "नंबर वन" टारगेट पर हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "वे अमेरिकी नेता, यानी मुझे, पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं। मैं उनकी हर लिस्ट में हूँ और मुझे लगता है कि अब तक मैं बस किस्मत वाला रहा हूँ।" गौरतलब है कि हाल ही में ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान भी सरेआम ट्रंप को मौत के घाट उतारने के नारे गूंजे थे, जिसके बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।

अपनों पर ही टूटे ट्रंप! 'NATO' को बताया मददगार और स्पेन से व्यापारिक रिश्ते खत्म करने की धमकी
ईरान के खिलाफ इस जंग में अमेरिकी राष्ट्रपति का गुस्सा सिर्फ दुश्मनों पर नहीं, बल्कि अपने ही सहयोगियों पर भी जमकर फूटा। ट्रंप ने नाटो सहयोगियों की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि वे इस गठबंधन से बेहद नाराज हैं क्योंकि नाटो ने ग्रीनलैंड के मामले में अमेरिका का साथ नहीं दिया और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले नंबर वन देश (ईरान) के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की जंग में मदद करने से हाथ पीछे खींच लिए। ट्रंप ने इस बात पर भी गहरी नाराजगी जताई कि अमेरिका को नाटो का बोझ उठाने के लिए "ज़रूरत से ज़्यादा भुगतान" करना पड़ता है। इतना ही नहीं, रक्षा बजट और ईरान युद्ध में सहयोग न करने को लेकर हुए कड़वे विवाद के बाद ट्रंप ने मंच से ही स्पेन के साथ सारा व्यापारिक लेन-देन तुरंत बंद करने की बड़ी चेतावनी दे डाली।
वैश्विक बाज़ारों में हाहाकार: कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उछाल, आने वाली है 'काली सर्दियां'?
ट्रंप के इस एक ऐलान ने दुनिया भर के शेयर बाजारों और ऊर्जा बाजारों में जैसे तबाही ला दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) की कीमतें तुरंत 5% से ज्यादा उछलकर $78 प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जिससे पिछले दो हफ्तों की राहत पल भर में खत्म हो गई। यूरोप में नेचुरल गैस की कीमतें भी 5% से ज्यादा बढ़कर €49 प्रति मेगावाट-घंटे से ऊपर चली गई हैं। इस उछाल ने यूरोपीय देशों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, क्योंकि वे सर्दियों के लिए गैस का स्टॉक भरने की कोशिश कर रहे थे और अब उनका खर्च कई गुना बढ़ जाएगा। शेयर बाजारों की बात करें तो ब्रिटेन का FTSE100 अचानक 1.4% टूट गया, जबकि फ्रांस का CAC 1.6% और जर्मनी का DAX 1.9% तक नीचे गिर गया है। निवेशक डरे हुए हैं और तेजी से सरकारी बॉन्ड बेच रहे हैं, जिससे 10-साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.57% पर पहुंच गई है, जो मई के बाद सबसे उच्चतम स्तर है।
क्या खत्म हो गया शांति का रास्ता?
अंकारा में आयोजित NATO समिट में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अब वे ईरान के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं करना चाहते। उन्होंने ईरानी नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे "खतरनाक और बीमार लोग" हैं और उनके साथ बातचीत करना समय की बर्बादी है। गौरतलब है कि 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता (MoU) हुआ था, जिसके तहत दोनों देशों ने संघर्ष रोकने और स्थायी शांति समझौते के लिए 60 दिनों तक बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई थी। लेकिन हालिया घटनाओं के बाद ट्रंप ने संकेत दिया कि वह समझौता अब प्रभावी नहीं माना जा रहा।
जर्मनी ने क्या कहा?
इस बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच जर्मनी ने भी इस विवाद में एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा स्टैंड लिया है। जर्मनी के विदेश मामलों के विशेषज्ञ जोहान वाडेफुल ने जर्मन ब्रॉडकास्टर NDR इन्फो से बात करते हुए अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए ताज़ा हमलों को पूरी तरह से "जायज़" ठहराया है। वाडेफुल ने कहा, "ईरान को अब सच में यह समझना होगा कि गंभीर बातचीत ज़रूरी है और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए आज़ाद रखना ही होगा, जिसे ईरान काफी हद तक रोक रहा है।" हालांकि, जहां ट्रंप ने बातचीत को पूरी तरह 'समय की बर्बादी' बता दिया है, वहीं जर्मनी को अब भी उम्मीद है कि यह असल बातचीत शुरू होने से पहले दोनों महाशक्तियों द्वारा केवल अपनी ताकत दिखाने की एक आखिरी कोशिश (Power Play) हो सकती है। लेकिन सवाल वही है-क्या समंदर में लगी यह आग तीसरे विश्व युद्ध का कारण बनेगी?


