
बिजनेस डेस्क। केंद्र सरकार ने वित्त विधेयक 2021 में संशोधन करके यह स्पष्ट किया है कि विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों (Foreign E-Commerce Companies) को 2 फीसदी डिजिटल टैक्स (Digital Tax) का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, इसके लिए सरकार ने एक बड़ी शर्त भी रखी है। सरकार का मानना है कि 2 फीसदी डिजिटल टैक्स छोड़ने से विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों को भारतीय बाजार में बराबरी का मौका मिल सकेगा।
क्या है टैक्स नहीं देने की शर्त
केंद्र सरकार ने डिजिटल टैक्स माफ करने के लिए यह शर्त रखी है कि विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों को स्थायी तौर पर देश में कारोबार करना होगा। साथ ही, उन्हें भारत सरकार को आयकर देना होगा। यह स्पष्ट कर दिया गया है कि जो विदेशी कंपनियां किसी तरह का टैक्स नहीं देती हैं, उन्हें 2 फीसदी डिजिटल टैक्स का भुगतान करना ही होगा।
कब हुई थी डिजिटल टैक्स की शुरुआत
बता दें कि डिजिटल टैक्स की शुरुआत अप्रैल 2020 में की गई थी। यह टैक्स सिर्फ ऐसी विदेशी कंपनियों पर लगाया गया है, जिनकी वार्षिक आय 2 करोड़ रुपए से ज्यादा है और जो ऑनलाइन कारोबार करती हैं।
क्या कहा निर्मला सीतारमण ने
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने लोकसभा में वित्त विधेयक पर बहस का जवाब देते हुए कहा कि यह टैक्स उन वस्तुओं पर लागू नहीं होता है, जो भारतीयों के पास है। उन्होंने कहा कि सरकार डिजिटल कारोबार के पक्ष में हैं और ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाएगा, जिससे यह कमजोर हो। उन्होंने कहा कि डिजिटल टैक्स उन विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए है, जो भारत में कारोबार करती हैं, लेकिन इनकम टैक्स नहीं देती हैं।
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