
Gold Silver Price Today: सोना और चांदी लंबे समय से भारतीय परिवारों की बचत और निवेश का अहम हिस्सा रहे हैं। शादी-ब्याह से लेकर त्योहारों तक, इनकी मांग हमेशा बनी रहती है। लेकिन पिछले कुछ दिनों में सर्राफा बाजार में जो बदलाव देखने को मिला है, उसने निवेशकों और खरीदारों दोनों का ध्यान खींचा है।
पिछले एक सप्ताह के दौरान सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। जहां सोना 2,106 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हुआ है, वहीं चांदी की कीमत में 11,250 रुपये प्रति किलोग्राम की बड़ी कमी आई है। ऐसे में कई लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या यह खरीदारी का सही मौका है या बाजार में अभी और गिरावट देखने को मिल सकती है।
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इंडियन बुलियंस एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 5 जून 2026 को सोने के दाम इस प्रकार रहे:
तुलना करें तो 2 जून 2026 को 24 कैरेट सोने का भाव 1,56,296 रुपये प्रति 10 ग्राम था। यानी महज कुछ दिनों में कीमतों में 2,106 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है।
सोने के साथ-साथ चांदी के बाजार में भी दबाव देखने को मिला है। 5 जून 2026 को चांदी का भाव 2,54,950 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। पिछले सप्ताह की तुलना में इसमें 11,250 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट आई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और मांग में कमी का असर चांदी की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।
सोना और चांदी की कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में सरकारी नीतियां भी शामिल हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने सोने और चांदी पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी की है। पहले इन धातुओं पर 6 प्रतिशत आयात शुल्क लागू था, जिसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। यानी अब सोना और चांदी आयात करने पर पहले की तुलना में 9 प्रतिशत अधिक शुल्क देना होगा। इसका असर आने वाले समय में घरेलू बाजार की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के वैश्विक आर्थिक हालात को देखते हुए लोगों से एक वर्ष तक सोने की खरीदारी कम करने की अपील की है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातक देशों में शामिल है। ऐसे में बड़े पैमाने पर सोने का आयात देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) पर दबाव बढ़ा सकता है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सरकार विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दे रही है।
सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि शादी-विवाह का प्रमुख सीजन समाप्त होने के बाद बाजार में मांग स्वाभाविक रूप से कम हो जाती है। इसके अलावा:
जैसे कारण भी बाजार की सुस्ती के पीछे जिम्मेदार माने जा रहे हैं।
वित्तीय एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोना और चांदी लंबे समय के निवेश के रूप में देखे जाते हैं। हालांकि कीमतों में हालिया गिरावट खरीदारों के लिए अवसर की तरह दिखाई दे सकती है, लेकिन निवेश का निर्णय हमेशा अपनी वित्तीय स्थिति, जोखिम क्षमता और निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही लेना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारणों से प्रभावित होते हैं, इसलिए केवल कीमतों में गिरावट देखकर निवेश करना उचित नहीं माना जाता।
एक सप्ताह में सोने की कीमत 2,106 रुपये और चांदी की कीमत 11,250 रुपये तक गिरने से बाजार में नई चर्चा शुरू हो गई है। जहां खरीदार इसे अवसर के रूप में देख रहे हैं, वहीं विशेषज्ञ अभी भी सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, सरकारी नीतियां और मांग का स्तर तय करेगा कि सोना-चांदी की कीमतें किस दिशा में आगे बढ़ेंगी।
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Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसे निवेश सलाह न माना जाए। किसी भी निवेश निर्णय से पहले वित्तीय विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
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