Dhoot Transmission IPO Subscription: भारत की 40% बाइकों में पार्ट्स लगाने वाली और ₹400 करोड़ मुनाफा कमाने वाली कंपनी का IPO 2 दिन में फुल हो गया। जानें अब क्या करें।

Dhoot Transmission IPO Review: महाराष्ट्र की धूत ट्रांसमिशन (Dhoot Transmission) भारत के स्कूटर और मोटरसाइकिल में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक कनेक्शन के करीब 40% वायर और केबल बनाती है। अब यही कंपनी ₹3,070 करोड़ का IPO लेकर बाजार में आई है। कंपनी की खास बात सिर्फ इतनी नहीं है कि इसका सामान बड़ी संख्या में दोपहिया वाहनों में इस्तेमाल होता है। FY26 में धूत ट्रांसमिशन ने करीब ₹4,500 करोड़ का रेवेन्यू और लगभग ₹400 करोड़ का मुनाफा कमाया। इसके अलावा कंपनी का कारोबार EV यानी इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार की बढ़ती मांग से भी फायदा उठा रहा है। यही वजह है कि निवेशकों की नजर इस IPO पर बनी हुई है। लेकिन सवाल क्या सिर्फ 40% दोपहिया वायरिंग मार्केट में पकड़ और EV ग्रोथ देखकर इस IPO में पैसा लगाना सही होगा? जानिए क्या कह रहें मार्केट एक्सपर्ट्स...

Dhoot Transmission IPO: जरूरी डिटेल्स

IPO की तारीख- 10 से 12 अगस्त, 2026

लिस्टिंग की तारीख- 17 अगस्त, 2026

फेस वैल्यू- ₹2 प्रति शेयर

प्राइस बैंड- ₹829 से ₹871

इश्यू प्राइस- ₹871 प्रति शेयर

लॉट साइज- 17 शेयर

बिक्री का प्रकार- फ्रेश कैपिटल और OFS

इश्यू का प्रकार- बुक-बिल्डिंग IPO

लिस्टिंग- BSE, NSE पर

Dhoot Transmission करती क्या है?

धूत ट्रांसमिशन ऐसी चीजें बनाती है जो वाहन के अलग-अलग इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक हिस्सों को आपस में जोड़ती हैं। गाड़ी के अंदर कई सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, बैटरी और दूसरे कंपोनेंट होते हैं। इन तक बिजली और सिग्नल पहुंचाने के लिए वायर, केबल और वायरिंग हार्नेस की जरूरत होती है। कंपनी की सबसे बड़ी ताकत उसका दोपहिया कारोबार है। दोपहिया वाहन उसके कुल कारोबार में करीब 65% योगदान देते हैं। यानी भारत में बाइक और स्कूटर की बिक्री बढ़ती है तो कंपनी के लिए इसका सीधा फायदा हो सकता है।

40% दोपहिया वायरिंग मार्केट पर कंपनी की पकड़

धूत ट्रांसमिशन भारत में स्कूटर और मोटरसाइकिल में इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जोड़ने वाले करीब 40% वायर और केबल बनाती है। इसका मतलब यह नहीं है कि देश की 40% बाइकों में पूरी की पूरी वायरिंग दूत की ही होती है। कंपनी का दावा उसके वायर और केबल से जुड़े कारोबार के हिस्से को लेकर है। इसलिए इस आंकड़े को उसी संदर्भ में समझना जरूरी है। फिर भी यह कंपनी की बाजार में मजबूत मौजूदगी दिखाता है।

धूत ट्रांसमिशन का सेल्स और प्रॉफिट

FY26 में कंपनी ने करीब ₹4,500 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया और लगभग ₹400 करोड़ का मुनाफा कमाया। यानी कंपनी सिर्फ तेजी से बढ़ने वाली कहानी नहीं है, बल्कि मुनाफा कमाने वाला कारोबार भी चला रही है। निवेशकों के लिए यह बात इसलिए जरूरी है, क्योंकि IPO बाजार में कई ऐसी कंपनियां भी आती हैं जो तेज ग्रोथ का दावा करती हैं लेकिन अभी मुनाफे में नहीं होतीं। धूत ट्रांसमिशन का मामला इससे अलग है। हालांकि, पुराने मुनाफे को देखकर भविष्य की कमाई की गारंटी नहीं मानी जा सकती। निवेश से पहले आने वाले सालों की ग्रोथ और वैल्यूएशन को भी देखना जरूरी है।

दो साल में बिक्री 60% बढ़ी

कंपनी के कारोबार में पिछले कुछ सालों में अच्छी ग्रोथ दिखाई दी है। FY24 से FY26 के बीच धूत ट्रांसमिशन की बिक्री करीब 60% बढ़ी। इसी अवधि में कंपनी की कुल आय में EV से आने वाला हिस्सा भी 16% से बढ़कर 24% हो गया। यानी कंपनी के लिए इलेक्ट्रिक वाहन अब सिर्फ भविष्य की कहानी नहीं हैं। इसका असर मौजूदा कारोबार में भी दिखने लगा है। साथ ही कंपनी की MCU (Manufacturing Capacity Utilisation) भी करीब दो-तिहाई से बढ़कर तीन-चौथाई तक पहुंच गई। अगर EV अडॉप्शन आगे बढ़ता है और कंपनी अपने ग्राहकों के साथ कारोबार बढ़ाने में सफल रहती है, तो कैपिसिटी यूटिलाइजेशन में और सुधार की गुंजाइश बन सकती है।

TVS और Bajaj जैसे बड़े ग्राहक

धूत ट्रांसमिशन की दूसरी बड़ी ताकत उसके ग्राहक हैं। कंपनी के ग्राहकों में टीवीएस मोटर कंपनी और बजाज ऑटो जैसे बड़े ऑटोमोबाइल नाम शामिल हैं। दोनों कंपनियां भारत के बड़े दोपहिया निर्माता हैं और इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में भी मजबूत मौजूदगी रखती हैं। इसलिए भारत में EV स्कूटर का बाजार बढ़ता है, तो धूत ट्रांसमिशन को अपने मौजूदा बड़े ग्राहकों के जरिए इसका फायदा मिलने की संभावना बनती है। हालांकि, किसी एक ग्राहक या सेगमेंट पर ज्यादा निर्भरता हमेशा एक जोखिम भी होती है। इसलिए निवेशकों को कंपनी के कस्टमर कंस्ट्रेशन और भविष्य के नए ग्राहक जोड़ने की क्षमता पर भी नजर रखनी चाहिए।

दूसरे दिन ही पूरा सब्सक्राइब हुआ IPO

धूत ट्रांसमिशन आईपीओ को निवेशकों की तरफ से अच्छा रिस्पॉन्स मिला और तीन दिन की बोली अवधि में यह दूसरे दिन की शुरुआत में ही पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया था। यह बाजार में कंपनी को लेकर मौजूद दिलचस्पी का संकेत है। धूत ट्रांसमिशन के IPO दस्तावेज के मुताबिक BS-VI के बाद ICE (Internal Combustion Engine) यानी पेट्रोल इंजन वाले दोपहिया वाहनों में वायर और केबल की जरूरत करीब 2.5 से 3.5 गुना बढ़ी। वहीं EV में BS-VI वाहन की तुलना में करीब 1.5 से 2.5 गुना ज्यादा जरूरत हो सकती है। यही वजह है कि EV का बढ़ता बाजार कंपनी के लिए बड़ा ग्रोथ अपॉर्च्युनिटी बन सकता है।

Dhoot Transmission IPO में पैसा लगाएं या नहीं?

मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, धूत ट्रांसमिशन के पक्ष में कई मजबूत बातें दिखाई देती हैं। कंपनी पहले से मुनाफे में है, दोपहिया सेगमेंट में मजबूत मौजूदगी रखती है, TVS और Bajaj जैसे बड़े ग्राहकों के साथ काम करती है और EV कारोबार में उसकी हिस्सेदारी बढ़ रही है। इसके अलावा पिछले दो साल में बिक्री करीब 60% बढ़ी है। EV का रेवेन्यू कॉन्ट्रिब्यूशन 16% से बढ़कर 24% हुआ है। लेकिन दूसरी तरफ कुछ जोखिम भी हैं। कंपनी का बड़ा कारोबार दोपहिया वाहन बाजार से जुड़ा है। अगर बाइक और स्कूटर की बिक्री धीमी पड़ती है तो इसका असर कंपनी पर आ सकता है। EV बाजार में टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है और मैन्यूफेक्चर्स अपने सप्लायर्स के साथ प्राइसिंग को लेकर दबाव बना सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसे निवेश की सलाह न माना जाए। शेयर बाजार और IPO में निवेश बाजार जोखिम के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले कंपनी के आधिकारिक दस्तावेज और अपने वित्तीय सलाहकार की सलाह जरूर लें।