Shiprocket IPO 12 अगस्त से खुल चुका है। 92-97 रुपए के प्राइस बैंड वाला ये इश्यू ग्रे मार्केट पर गदर काट रहा है। पहले ही दिन लिस्टिंग पर 31% तक मुनाफे का अनुमान है।
Shiprocket IPO: ई-कॉमर्स कंपनियों को लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी सर्विस देने वाले प्लेटफॉर्म शिपरॉकेट (Shiprocket) का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) आज 12 अगस्त 2026 से निवेशकों के लिए खुल चुका है। ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयरों की जबर्दस्त डिमांड देखने को मिल रही है। आईपीओ खुलने के पहले ही दिन इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) इशारा कर रहा है कि निवेशकों को लिस्टिंग पर तगड़ा मुनाफा हो सकता है। आइए जानते हैं Shiprocket IPO की प्राइस बैंड, जीएमपी, ब्रोकरेज की राय और आपको इसमें पैसा लगाना चाहिए या नहीं...
Shiprocket IPO GMP: ग्रे मार्केट में 31% लिस्टिंग गेन का संकेत
पहले दिन ही ग्रे मार्केट में बुधवार को Shiprocket IPO का GMP 30 रुपए से ज्यादा पर ट्रेंड कर रहा है। इसका अपर प्राइस बैंड 97 रुपए है। ग्रे मार्केट के संकेतों से संभावित लिस्टिंग प्राइस 127 रुपए हो सकती है। मतलब संभावित मुनाफा 30.93% तक हो सकता है। पिछले 7 ट्रेडिंग सेशंस से इसका जीएमपी 14 रुपए से लेकर 30 रुपए के बीच मजबूती से आगे बढ़ रहा है। बाजार का यह रुख साफ दिखाता है कि दलाल स्ट्रीट पर इस इश्यू से बंपर लिस्टिंग की उम्मीदें लगाई जा रही हैं।
Shiprocket IPO के जरूरी डिटेल्स
आईपीओ खुलने की तारीख- 12 अगस्त 2026
आईपीओ बंद होने की तारीख- 14 अगस्त 2026
प्राइस बैंड (Price Band)- 92 से 97 रुपए प्रति शेयर
मिनिमम लॉट साइज- 154 शेयर
कम से कम निवेश (Retail)- 14,938 रुपए (अपर प्राइस बैंड पर)
शेयर अलॉटमेंट की तारीख- 17 अगस्त 2026
लिस्टिंग की तारीख- 19 अगस्त 2026 (NSE और BSE पर)
कुल इश्यू साइज- 1,617.58 करोड़ रुपए
फ्रेश इश्यू- 885.60 करोड़ रुपए
OFS- 731.98 करोड़ रुपए
Shiprocket IPO: पहले ही दिन रिटेल निवेशकों का दिख रहा रुझान
इस आईपीओ का सिर्फ 10% हिस्सा ही रिटेल निवेशकों के लिए रिजर्व रखा गया है। वहीं 75% हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) और 15% नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) के लिए आरक्षित है। आईपीओ खुलने के पहले ही दिन सुबह 10:10 बजे तक ओवरऑल सब्सक्रिप्शन 7% देखने को मिला। इस समय तक रिटेल पोर्शन 26% और NII पोर्शन 8% तक बुक हो चुका था।
Shiprocket IPO को लेकर ब्रोकरेज की सलाह क्या है?
कंपनी फिलहाल घाटे में है, लेकिन इसके बिजनेस मॉडल और गिरते घाटे को देखकर एक्सपर्ट्स का नजरिया मिला-जुला और पॉजिटिव है। livemint.com ने SBICAP Securities के हवाले से बताया कि ब्रोकरेज ने 'सब्सक्राइब' करने की सलाह दी है। ब्रोकरेज के अनुसार, कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ (FY24-FY26 के बीच) 24% CAGR की रफ्तार से बढ़ी है। कंपनी का घाटा 351 करोड़ रुपए (FY24) से घटकर अब 76 करोड़ रुपए (FY26) पर आ गया है। कंपनी फ्रेश इश्यू से मिलने वाले पैसों में से 210 करोड़ रुपए का कर्ज चुकाएगी, जिससे इसका कुल कर्ज 242 करोड़ रुपए से घटकर महज 32 करोड़ रुपए रह जाएगा। इससे ब्याज का खर्च घटेगा और मुनाफा तेजी से बढ़ेगा।
शिप रॉकेट जुटाए गए पैसों का क्या करेगी?
Shiprocket फ्रेश इश्यू से जुटाए गए ₹885.60 करोड़ में से ₹294 करोड़ ब्रांड बिल्डिंग और मार्केटिंग में खर्च करेगी। ₹211 करोड़ टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में लगाएगी। ₹210 करोड़ कंपनी का पुराना कर्ज चुकाने में इस्तेमाल होगा। बाकी रकम नए बिजनेस अधिग्रहण (Acquisitions) और कॉर्पोरेट कामों में जाएगी।
इस आईपीओ में पैसा लगाएं या नहीं?
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, ग्रे मार्केट का 31% प्रीमियम और बढ़ता जीएमपी इशारा कर रहा है कि शॉर्ट-टर्म मुनाफे (Listing Gain) के लिए यह एक अच्छा दांव साबित हो सकता है। लॉन्ग-टर्म निवेश के लिए अगर आप रिस्क ले सकते हैं और भारत के बढ़ते B2C ई-कॉमर्स सेक्टर पर भरोसा रखते हैं, तो 2-3 साल के नजरिए से इसमें पैसा लगाया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दिए गए आंकड़े, जीएमपी (GMP) की जानकारी, ब्रोकरेज हाउस की राय और शेयर बाजार से जुड़े तथ्य सिर्फ सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों (Educational & Informational Purpose) के लिए हैं। इसे किसी भी प्रकार की स्टॉक या आईपीओ (IPO) में खरीद-बिक्री की निवेश सलाह न माना जाए। शेयर बाजार और आईपीओ में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है। किसी भी आईपीओ या शेयर में पैसा लगाने से पहले अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार (SEBI Registered Financial Advisor) से सलाह जरूर लें। किसी भी वित्तीय फैसले और उससे होने वाले लाभ-हानि के लिए लेखक या वेबसाइट जिम्मेदार नहीं होगी।


