
नई दिल्ली: ईरान और इजरायल के बीच जंग और पश्चिम एशिया में बने संकट के हालात का असर अब हमारी रसोई पर भी पड़ने लगा है। देश में खाने के तेल की कीमतें बढ़नी शुरू हो गई हैं। केरल के बाद सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले सूरजमुखी तेल (सनफ्लावर ऑयल) का दाम सिर्फ एक हफ्ते में 4 से 5 रुपये प्रति लीटर तक चढ़ गया है। वहीं, सनफ्लावर और राइस ब्रान जैसे तेलों को मिलाकर बेचे जाने वाले ब्लेंडेड ऑयल (मिश्रित तेल) 10 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो गए हैं।
भारत में सूरजमुखी तेल का सबसे बड़ा उत्पादक कर्नाटक है, हालांकि महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में भी इसकी खेती होती है। लेकिन देश में इसकी जितनी खपत है, उस हिसाब से उत्पादन काफी कम है। इसलिए हमें अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से मंगाना पड़ता है। हम मुख्य रूप से यूक्रेन, रूस, अर्जेंटीना और बुल्गारिया से सूरजमुखी तेल का आयात करते हैं। बाजार के ताजा हालात देखकर साफ है कि जंग की वजह से इस आयात पर असर पड़ना शुरू हो गया है।
एक हफ्ता पहले, यानी जंग शुरू होने से पहले, बेंगलुरु में एक लीटर सूरजमुखी तेल 161 रुपये में मिल रहा था। आज इसकी कीमत बढ़कर 165 रुपये हो गई है। बाजार के रेट्स से पता चलता है कि यह बढ़ोतरी किसी एक ब्रांड में नहीं, बल्कि सभी तरह के सूरजमुखी तेलों में हुई है। इसके अलावा, बाजार में सफोला गोल्ड जैसे ब्लेंडेड ऑयल भी मिलते हैं, जिनमें सूरजमुखी तेल के साथ दूसरे तेल मिक्स होते हैं। ऐसे तेलों की कीमत 11 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गई है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में सूरजमुखी और ब्लेंडेड ऑयल के दाम 10 से 20 रुपये और बढ़ सकते हैं। केरल जैसे राज्यों में, जहां सूरजमुखी तेल कर्नाटक के मुकाबले पहले से ही 5-6 रुपये महंगा बिकता है, वहां आने वाले दिनों में कीमत 200 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच जाए तो कोई हैरानी नहीं होगी।
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