
अचानक नौकरी चली जाना किसी के लिए भी एक बड़ा झटका होता है। क्योंकि लोन की EMI, बच्चों की स्कूल फीस और घर के खर्च जैसी चीजें मुश्किल में पड़ जाती हैं। जब कमाई का जरिया बंद हो जाता है, तो डर लगना स्वाभाविक है। लेकिन शुरुआती कुछ हफ्तों में आप जो फैसले लेते हैं, वही तय करते हैं कि आप इस संकट से कैसे उबरेंगे। यहां घबराकर फैसले लेने के बजाय, आइए जानते हैं कि नई नौकरी मिलने तक आप अपने पैसों को कैसे मैनेज कर सकते हैं:
खर्चे कम करने से पहले, यह जानना जरूरी है कि आपके पास कुल कितने पैसे हैं। अपने बैंक अकाउंट का बैलेंस, इमरजेंसी फंड, दूसरे निवेश और कंपनी से मिलने वाली फाइनल सेटलमेंट की रकम को चेक करें। अब यह हिसाब लगाएं कि इस पैसे से आप कितने दिन तक गुजारा कर सकते हैं। इसके लिए सिर्फ किराया, खाना, बिजली बिल, इंश्योरेंस, स्कूल फीस और EMI जैसे जरूरी खर्चों को ही गिनें। इसका मकसद आपको डराना नहीं, बल्कि आपकी आर्थिक स्थिति की एक साफ तस्वीर देना है।
नौकरी जाने के बाद लोग अक्सर यह गलती करते हैं कि वे खर्चे कम करने में देर कर देते हैं। छोटे-छोटे खर्चे बाद में एक बड़ा बोझ बन जाते हैं। इसलिए, जिन सब्सक्रिप्शन की जरूरत नहीं है, उन्हें तुरंत कैंसल कर दें। कोई भी बड़ी चीज खरीदने का प्लान टाल दें। इस समय खर्च में कटौती को सजा की तरह न देखें, यह सिर्फ एक अस्थायी सावधानी है।
अगर आपके हाथ में कैश रहता है, तो मुश्किल समय में आत्मविश्वास बना रहता है। इसलिए, इस दौरान अपना पैसा किसी लंबी अवधि के निवेश या ऐसी स्कीम में न लगाएं, जहां से इसे तुरंत निकालना मुश्किल हो। अगर आपको अपने निवेश से पैसा निकालना भी पड़े, तो एक साथ पूरी रकम निकालने से बचें।
अगर आपकी कोई EMI या क्रेडिट कार्ड का बिल बकाया है, तो पेमेंट बाउंस होने का इंतजार न करें। कई बैंक EMI को रीस्ट्रक्चर करने या कुछ समय के लिए पेमेंट टालने की सुविधा देते हैं। अगर पेमेंट रुक जाती है, तो इससे आपका क्रेडिट स्कोर खराब होगा। इसलिए, पहले ही बैंक से बात करके अपनी स्थिति साफ कर दें।
इमरजेंसी फंड ऐसे ही मुश्किल समय के लिए होता है। इसलिए इसे इस्तेमाल करने में हिचकिचाएं नहीं। लेकिन एक ही बार में पूरी रकम निकालकर खर्च न करें, बल्कि हर महीने की जरूरत के हिसाब से ही पैसा निकालें।
नौकरी जाने पर क्रेडिट कार्ड, 'पे लेटर' ऐप्स और आसानी से मिलने वाले पर्सनल लोन एक बड़े सहारे की तरह लग सकते हैं। लेकिन ये आपको ऊंचे ब्याज वाले कर्ज के जाल में फंसा सकते हैं। जब तक कोई पक्की इनकम का जरिया न मिल जाए, तब तक अपने ऊपर कोई नया बोझ न डालें।
अपनी पसंद की नौकरी मिलने का इंतजार करने के बजाय, जो भी फ्रीलांस या कॉन्ट्रैक्ट पर काम मिले, उसे करने से न कतराएं। इससे होने वाली छोटी-मोटी कमाई भी आपकी पैसों की तंगी को कुछ हद तक कम करने में मदद करेगी। इसे एक कदम पीछे हटना न समझें, बल्कि यह संकट से निपटने का एक तरीका है।
नौकरी छूटना एक बड़ा मानसिक तनाव देता है। यह अक्सर गलत फैसले लेने की वजह बनता है। अपने खर्चों को ट्रैक करने और नौकरी खोजने के लिए एक रूटीन बनाएं। पैसों की स्थिति के बारे में परिवार वालों से खुलकर बात करें। अकेले टेंशन लेने के बजाय, सब मिलकर इस मुश्किल का सामना करें।
याद रखें, यह सिर्फ एक अस्थायी संकट है। इस समय आप जो फैसले लेते हैं, वे बहुत मायने रखते हैं। बिना घबराए, धैर्य के साथ हालात का सामना करने पर आप पैसों की तंगी से बचते हुए एक बेहतर नौकरी पा सकते हैं।
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