
नई दिल्ली। कोरोना महामारी (COVID-19) के झटकों से शुरू हुई अशांति और बाद में फरवरी 2022 में शुरू हुए रूस-यूक्रेन जंग के चलते वैश्विक बाजारों में 14 ट्रिलियन डॉलर (1,15,79,47,00,00,00,000 रुपए ) का नुकसान हुआ है।
2022 में अशांत समय में सुरक्षित संपत्ति माने जाने वाले अमेरिकी ट्रेजरी और जर्मन बॉन्ड में क्रमशः 16 प्रतिशत और 24 प्रतिशत की गिरावट आई। क्रिप्टो मार्केट और बिटकॉइन 60 प्रतिशत लुढ़क गया। एफटीएक्स साम्राज्य के पतन के साथ क्रिप्टो बाजार को 1.4 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। EFG बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री और आयरलैंड के केंद्रीय बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर स्टीफन गेरलाच ने कहा कि इस साल वैश्विक बाजारों में जो कुछ हुआ है वह दर्दनाक है।
वैश्विक झटके से कम प्रभावित हुआ भारत
विश्व बैंक ने बताया है कि 2022 में लगे वैश्विक झटके से भारत अपेक्षाकृत कम प्रभावित हुआ। विश्व बैंक ने हाल की एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत वैश्विक उथल-पुथल को नेविगेट करने के लिए बेहतर स्थिति में है। भारतीय अर्थव्यवस्था ने चुनौतीपूर्ण वैश्विक वातावरण के बावजूद 'लचीलापन' प्रदर्शित किया है। विश्व बैंक ने 5 दिसंबर को एक रिपोर्ट में कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था अन्य उभरते बाजारों की तुलना में वैश्विक स्पिलओवर से अपेक्षाकृत अलग है।
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विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार भारत की अर्थव्यस्था में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में सुधार हुआ है। रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ते लचीलेपन के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों और नियामक उपायों को भी श्रेय दिया गया है। दिसंबर की शुरुआत में भारतीय इक्विटी ने अब तक के उच्चतम स्तर को छुआ था। निफ्टी 18,800 के अंक को पार कर गया था।
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