
नई दिल्ली. देश में आर्थिक मंदी का दौर जारी है। घटती जीडीपी समेत टेक्सटाइल, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर के सेल्स और प्रोडक्शन में लगातार गिरावट देखी जा रही रही है। कई कंपनियां प्लांट बंद कर चुकी हैं तो वहीं लाखों लोगों की छंटनी हो चुकी है। जिसको लेकर मोदी सरकार एक्टिव दिखाई दी और टास्क फोर्स समिति का गठन कर दिया। इस समिति का लक्ष्य है अगले 5 सालों में 1.4 ट्रिलियन डॉलर का निवेश बढ़ाने के लिए रोडमैप तैयार करना।
समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट 31 दिसंबर तक सौंपेगी
वित्त मंत्रालय ने एक बयान जारी किया है और कहा है कि, ''देश की जीडीपी को साल 2024-25 तक 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लिए देश में 1.4 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 100 लाख करोड़) से अधिक के निवेश की आवश्यकता है। निवेश के रोडमैप को टास्क फोर्स समिति तैयार करेगी। यह समिति अपनी पहली रिपोर्ट 31 अक्टूबर तक देगी। जिसमें 2019-20 के निवेश का टारगेट होगा।'' उन्होंने कहा कि समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट 31 दिसंबर तक सौंपेगी। इस रिपोर्ट में 2024-25 तक के इन्वेस्टमेंट का टारगेट होगा।
मंत्रालयों को फंड जुटाने के रास्ते खोजने में मदद करेगी
डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमी अफेयर्स (DEA) सेक्रेटरी के नेतृत्व में टास्क फोर्स समिति की काम करेगी। समिति में नीति आयोग और वित्त मंत्रालय के सीनियर अधिकारी भी शामिल होंगे। ये समिति इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की पहचान करेगी और इन प्रोजेक्ट्स पर आने वाले खर्च की रिपोर्ट भी तैयार करेगी। ये बाकी मंत्रालयों को फंड जुटाने के रास्ते तलाशने में भी मदद करेगी।
पहली तिमाही विकास दर 5.8 फीसदी से घटकर 5 फीसदी रह गई-आंकड़े
ताजा आंकड़े के अनुसार पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में विकास दर 5.8 फीसदी से घटकर 5 फीसदी रह गई है। यह रफ्तार मोदी सरकार की किसी एक तिमाही में सबसे सुस्त है। बता दें कि मोदी सरकार ने अगले पांच साल में देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके लिए लगातार कई सालों तक सालाना 9 प्रतिसत की ग्रोथ रेट होनी चाहिए।
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