
बिजनेस डेस्क. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बीते साल 19 मई को दो हजार के नोटों को सर्कुलेशन से वापस लेने का ऐलान कर दिया। अब इसे लेकर राज्यसभा में दो हजार के नोटों की प्रिंटिंग और उसे नष्ट करने में खर्च हुई रकम के बारे में राज्यसभा सांसद संदीप कुमार पाठक ने सरकार से सवाल पूछा गया। इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जवाब दिया हैं। उन्होंने बताया कि 12,877 करोड़ रुपए की लागत से नोट की छपाई की गई। वहीं, इसे नष्ट करने में कितना खर्च आया इसकी गणना नहीं की गई है।
दो हजार के नोट की प्रिंटिंग और नष्ट करने पर आया कितना खर्च
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा सांसद संदीप कुमार पाठक के सवाल का लिखित जवाब देते हुए बताया कि दो हजार रुपए के डिनॉमिनेशन वाले 370.2 करोड़ के नोटों की सप्लाई की गई, जिसकी वैल्यू 7.40 लाख करोड़ रुपए है। उन्होंने बताया कि जुलाई 2016 से जून 2017 और जुलाई 2017 से जून 2018 के बीच सभी डिनॉमिनेशन वाले नोटों की प्रिंटिंग पर 7965 करोड़ रुपए और 4912 करोड़ रुपए खर्च आया था। यानी टोटल खर्च 12,877 करोड़ रुपए का खर्च आया था।
RBI एक्ट तहत लाए गए थे दो हजार के नोट
राज्यसभा में ये भी सवाल पूछा गया कि दो हजार के नोट लाने और वापस लेने की सिफारिश किसने की थी। इसके जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि नवंबर 2016 में 500 और 1 हजार के नोट सर्कुलेशन में मौजूद टोटल नोटों की वैल्यू का 86.4 फीसदी था। ऐसे में सरकार पर जिम्मेदारी थी अर्थव्यवस्था में करेंसी की जरूरतों को पूरा किया जाए। ऐसे में 10 नवंबर 2016 को RBI एक्ट 1924 के सेक्शन 24(1) के तहत भारतीय रिजर्व बैंक ने 2000 के नोटों को सर्कुलेशन में लाया गया। साथ ही जब इन नोटों को लाने का मकसद पूरा हो गया तब इसे सर्कुलेशन से बाहर कर दिया गया।
एक हजार नोटों की छपाई पर कितना खर्च
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नोटो के छपाई में खर्च के जवाब में बताया कि दो हजार के 1 हजार नोटों की छपाई पर 3540 रुपए का खर्च आया है। एक नोट की छपाई पर 3 रुपए 54 पैसे की लागत आई है। ऐसे में 3702 मिलियन नोटों की छपाई पर 1310.50 करोड़ रुपए का खर्च आया है।
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