
बिजनेस डेस्क : गौतम अडानी और उनके भतीजे समेत ग्रुप से जुड़े 7 लोगों पर लगे रिश्वतखोरी के आरोप पर अडाणी ग्रुप (Adani Group) का बड़ा बयान सामने आया है। अडाणी ग्रुप ने साफ कर दिया है कि चेयरमैन गौतम अडाणी (Gautam Adani), उनके भतीजे सागर अडाणी (Sagar Adani) और सीनियर एग्जीक्यूटिव विनीत जैन पर अमेरिका में रिश्वत से जुड़े कोई आरोप नहीं हैं। इन सभी के खिलाफ US फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेस एक्ट (FCPA) के तहत रिश्वत और भ्रष्टाचार के आरोपों पर मीडिया हाउसेस में चल रही खबरें पूरी तरह गलत हैं। हालांकि, इन सभी पर अमेरिका में सिक्योरिटीज और वायर फ्रॉड से जुड़े केस हैं।
अडाणी ग्रुप ने बताया कि अमेरिका डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस में 5 केस हैं, जिनमें गौतम अडाणी, सागर अडाणी या विनीत जैन काउंट 1 (FCPA का उल्लंघन करने की साजिश) और काउंट 5 (जांच में बाधा डालने की साजिश) में शामिल नहीं हैं। काउंट 1 में रंजीत गुप्ता, सिरिल कैबेन्स, सौरभ अग्रवाल, दीपक मल्होत्रा और रूपेश अग्रवाल का नाम है। ग्रुप की तरफ से आए बयान में बताया गया है कि डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने इसके तहत अडाणी ग्रुप के किसी का नाम नहीं लिया है।
अडाणी ग्रुप ने अपने बयान में बताया कि उनके अधिकारियों पर सिर्फ काउंट 2 (कथित सिक्योरिटी फ्रॉड कॉन्स्पिरेसी), काउंट 3 (कथित वायर फ्रॉड कॉन्स्पिरेसी) के आरोप हैं। बता दें कि 21 नवंबर 2024 को गौतम अडाणी समेत 7 लोगों पर 265 मिलियन डॉलर यानी करीब 2,200 करोड़ रुपए की रिश्वत देने का आरोप लगाया गया था। यह पूरा मामला अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और एक अन्य फर्म से जुड़ा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट में तो यहां तक कहा गया था कि गौतम अडाणी और सागर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी कर दिया गया है। बता दें कि सागर, अडाणी ग्रीन एनर्जी के अधिकारी हैं।
अमेरिका डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस में फाइलिंग के अनुसार, SECI (सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) ने भारत में 12 गीगावॉट की बिजली सप्लाई करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट निकाला। दिसंबर 2019 और जुलाई 2020 तक अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) और एक विदेशी फर्म को ये कॉन्ट्रैक्ट मिल भी गया। इसमें समस्या तब आई, जब AGEL और विदेशी फर्म से खरीदी इलेक्ट्रिसिटी के लिए SECI को कस्टमर्स ही नहीं मिल रहे थे। ऐसे में वो दोनों ग्रुप से पावर नहीं खरीद पाता। जिसके अडाणी और विदेशी फर्म को नुकसान होता।
आरोप पत्र के अनुसार, सागर अडाणी, विनीत जैन समेत 7 लोगों ने अधिकारियों को रिश्वत देने की साजिश रची, ताकि राज्य सरकारें एसईसीआई से पावर सेल एग्रीमेंट कर लें और उनके एग्रीमेंट को बायर्स मिल जाए।
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