BharatPe को कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने दिया नोटिस, मांगी अश्नीर ग्रोवर के खिलाफ कार्यवाही की जानकारी

Published : Feb 07, 2024, 08:59 AM ISTUpdated : Feb 07, 2024, 09:54 AM IST
BharatPe

सार

भारत सरकार के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने BharatPe को नोटिस जारी किया है। BharatPe कंपनी के बोर्ड और इसके संस्थापक अश्नीर ग्रोवर के बीच विवाद चल रहा है। मंत्रालय ने 2022 में कंपनी में कथित कॉर्पोरेट प्रशासन की खामियों की जांच शुरू की थी। 

नई दिल्ली। फिनटेक यूनिकॉर्न भारतपे (BharatPe) को कंपनी अधिनियम की धारा 206 के तहत कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) से नोटिस मिला है। इसमें कंपनी द्वारा अपने संस्थापक अश्नीर ग्रोवर के खिलाफ शुरू की गई कानूनी कार्यवाही के बारे में जानकारी मांगी गई है।

BharatPe कंपनी के बोर्ड और इसके संस्थापक अश्नीर ग्रोवर के बीच विवाद चल रहा है। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने 2022 में कंपनी में कथित कॉर्पोरेट प्रशासन की खामियों की जांच शुरू कराई थी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार MCA ने कंपनी से ग्रोवर के खिलाफ दीवानी और आपराधिक शिकायतों के बारे में अदालतों को सौंपे गए सबूत मांगे हैं।

भारतपे ने कहा- कंपनी के अधिकारी जांच में कर रहे सहयोग

MCA से मिले नोटिस के बारे में भारतपे ने बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि एक पत्र के माध्यम से कंपनी से आरओसी से अतिरिक्त जानकारी मांगी गई है। 2022 में आंतरिक शासन समीक्षा के बाद जांच शुरू की गई थी। इसी के हिस्से के रूप में और जानकारी मांगी गई है। कंपनी के अधिकारी जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।

2022 की शुरुआत में विवादों में घिर गई थी भारतपे

बता दें कि भारतपे कंपनी 2022 की शुरुआत में विवादों में घिर गई थी। चार साल पुरानी कंपनी के संस्थापक पर नायका आईपीओ में आवंटन सुरक्षित करने में विफल रहने, अनुचित भाषा का इस्तेमाल करने और कोटक समूह के एक कर्मचारी को धमकी देने का आरोप लगाया गया था। विवाद के बाद ग्रोवर ने भारतपे के प्रबंध निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया था। कंपनी ने उनकी देखरेख में हुए पैसे की लेनदेन की फोरेंसिक ऑडिट शुरू की थी।

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बाद में कंपनी ने अश्नीर ग्रोवर के खिलाफ सिविल मुकदमा किया था। इसमें फर्जी बिलों से पैसे लेने और व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए कंपनी के पैसे के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था। संदिग्ध लेनदेन और नकली विक्रेताओं के आरोपों के अलावा, कंपनी ने आरोप लगाया था कि ग्रोवर ने भारतपे तकनीक या कॉन्सेप्ट में कुछ भी योगदान नहीं दिया। कंपनी के साथ उनका जुड़ाव 2018 में शुरू हुआ जब उन्होंने 31,920 रुपए का 'मामूली' निवेश किया, जिसके लिए उन्हें 3,192 शेयर मिले थे।

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