
बिजनेस डेस्क. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को संसद में वित्त वर्ष 2023-24 के लिए बजट (Budget 2023-24) पेश किया। बजट भाषण के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार ग्रीन ग्रोथ को ध्यान में रखकर आगे की योजनाएं बना रही है। उन्होंने बताया कि ग्रीन ग्रोथ को अब एक मिशन बनाया गया है और कई स्तर पर योजनाओं के जरिए कार्बन इंटेंसिटी को बेहद कम करते हुए अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने का काम किया जाएगा। इस मौके पर जानें कि आखिर ग्रीन ग्रोथ किसे कहते हैं।
क्या है ग्रीन ग्रोथ?
ग्रीन ग्रोथ (Green Growth) को हिंदी में हरित विकास कहा जाता है। हरित विकास में प्राकृतिक ऊर्जा स्त्रोतों का इस्तेमाल करते हुए कार्बन उत्सर्जन व प्रदूषण को कम करने के साथ विकास करने की कोशिश की जाती है। इसी वजह से वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि देश के अलग-अलग इकोनॉमिक सेक्टर्स में ग्रीन फ्यूल, ग्रीन एनर्जी, ग्रीन फार्मिंग, ग्रीन बिल्डिंग, ग्रीन इक्विपमेंट, ग्रीन मॉबिलिटी आदि के लिए कई योजनाएं लाई जा रही हैं।
मिलेंगी ग्रीन जॉब्स
वित्तमंत्री ने आगे कहा कि ग्रीन ग्रोथ की दिशा में उठाए जा रहे इन कदमों से अर्थव्यवस्था में विकास के साथ-साथ कार्बन इंटेंसिटी को कम करने में मदद मिलेगी और इसके साथ ही अब 'ग्रीन जॉब' भी मिलेंगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि लद्दाख में रिन्युएबल एनर्जी (Renewable Energy) के लिए करीब 20 हजार 700 करोड़ रु का फंड दिया जाएगा। साथ ही 2030 तक पांच मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही एनर्जी ट्रांजिशन के लिए करीब 19 हजार 700 करोड़ व एनर्जी सिक्योरिटी के लिए 35 हजार करोड़ का आवंटन किया गया है।
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