
नोएडा: होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के बाद परिवार के बड़े बिजनेस में एक बड़ी जिम्मेदारी संभाली, पूरे बिजनेस को कामयाबी से आगे बढ़ाया और साथ ही एक स्टार्टअप भी शुरू किया जिसमें शुरुआती सफलता भी मिली। लेकिन एक वायरस की वजह से परिवार और खुद का बनाया बिजनेस, शुरू किया गया स्टार्टअप, संपत्ति, आलीशान जिंदगी, कार, सब कुछ पल भर में खत्म हो गया। आखिर में सिर्फ एक बाइक बची। अब वही बाइक चलाकर रैपिडो ड्राइवर के तौर पर जिंदगी गुजार रहे इस बिजनेसमैन की दर्दभरी कहानी सामने आई है। एक्स यूजर चिराग ने इस बिजनेसमैन की जिंदगी का दुखद पहलू उजागर किया है।
चिराग ने काम पर जाने के लिए एक रैपिडो बाइक टैक्सी बुक की। कुछ ही मिनटों में बाइक टैक्सी आ गई। बाइक पर बैठते समय रैपिडो ड्राइवर ने सामान्य सवाल पूछे कि कहां जाना है, वगैरह। इसका जवाब देकर चिराग बाइक पर बैठ तो गए, लेकिन उतरते समय उनका दिल भारी था। चिराग ने बताया कि जिंदगी कभी-कभी कितनी बेरहम हो सकती है और किस्मत क्या-क्या खेल दिखाती है। चिराग ने इस रैपिडो ड्राइवर की दुखभरी कहानी का खुलासा किया है।
चिराग ने अपने एक्स अकाउंट पर बताया कि कुछ बातचीत के दौरान जब उन्होंने ड्राइवर के बारे में पूछा, तो उसने अपनी जिंदगी की कहानी सुनानी शुरू कर दी। रैपिडो ड्राइवर ने एमिटी से होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की थी। उसके पिता भारतीय सेना में थे। रिटायरमेंट के बाद वे पूरी तरह से बिजनेस में लग गए थे। इसलिए, इस बिजनेस में बड़ी जिम्मेदारी, दौलत, संपत्ति, कमाई, किसी भी चीज की कोई कमी नहीं थी। महीने की कमाई और खर्च का कोई हिसाब नहीं था। परिवार के साथ खुशी के पल, घूमना-फिरना, सब कुछ बढ़िया चल रहा था, जैसा कि उसने राइड के दौरान बताया।
जी हां, यह कोई ऐसा-वैसा वायरस नहीं, बल्कि कोविड महामारी थी। वह वायरस जिसने दुनिया को कुछ सालों के लिए थाम दिया था। इस वायरस की वजह से बिजनेसमैन के सभी बिजनेस पर भारी मार पड़ी। उसने पास मौजूद पैसों से बिजनेस को चलाने की बहुत कोशिश की। यह सोचकर कि कुछ दिनों में लॉकडाउन खत्म हो जाएगा और सब कुछ सामान्य हो जाएगा, उसने कंपनी की कमाई, अपनी कमाई और बचत के सारे पैसे लगाकर बिजनेस को बचाने की कोशिश की। लेकिन आखिर में उसे बिजनेस बंद करना पड़ा। कोविड शुरू होने से ठीक पहले शुरू किया गया स्टार्टअप भी बंद करना पड़ा। कर्मचारियों की सैलरी, मुआवजा, कंपनी पर कर्ज, सब मिलाकर एक ही झटके में 13 से 14 करोड़ रुपये का नुकसान हो गया। बिजनेस को फिर से खड़ा करने की कोशिश भी नाकाम रही। पास बचे 5 लाख रुपये में से 4 लाख रुपये खर्च करके दोस्त के साथ मिलकर एक और स्टार्टअप शुरू किया, लेकिन वह भी नहीं चला। कर्ज चुकाने के लिए कार, घर, सब कुछ बेचना पड़ा। कुछ संपत्ति बैंक नीलामी में चली गई। जब सारा कर्ज चुका दिया, तो सिर्फ एक बाइक बची, यह बताते हुए रैपिडो ड्राइवर की आंखों में आंसू आ गए। इस घटना के बारे में चिराग ने बताया है।
मैं हार गया हूं। रैपिडो चलाकर जिंदगी कट रही है। कुछ पैसे जमा करके, मैं फिर से बिजनेस शुरू करने की कोशिश करूंगा। यह मेरी आखिरी कोशिश होगी। मुझे जीत का भरोसा है। फिलहाल, बस गुजारा हो पा रहा है, रैपिडो ड्राइवर ने बताया।
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