
हमने ऐसे कई लोगों की कहानियां सुनी हैं जो मौत के मुंह से बचकर ज़िंदगी में वापस लौटे हैं। लेकिन चीनी करोड़पति और गेमिंग प्लेटफॉर्म 'सेरेनिटी फोर्ज' के मालिक झेंगहुआ यांग की कहानी किसी को भी हैरान कर देगी। 18 साल की उम्र में, डॉक्टरों ने झेंगहुआ को एक गंभीर बीमारी के चलते सिर्फ तीन घंटे का मेहमान बताया था। लेकिन, उस भविष्यवाणी को गलत साबित करते हुए झेंगहुआ यांग ज़िंदगी में वापस लौटे और आज 35 साल की उम्र में 90 करोड़ के गेमिंग साम्राज्य के मालिक हैं।
इलिनॉय यूनिवर्सिटी में फर्स्ट ईयर के छात्र रहते हुए झेंगहुआ की नाक से खून बहने लगा। जांच के बाद, डॉक्टरों ने पाया कि उन्हें क्रॉनिक रिफ्रैक्टरी इडियोपैथिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक पुरपुरा (ITP) नाम की एक दुर्लभ ऑटोइम्यून बीमारी है। डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि झेंगहुआ के पास जीने के लिए सिर्फ तीन घंटे हैं। लेकिन, लगभग दो साल अस्पताल में रहने के बावजूद, उन्होंने अपनी किस्मत बदल दी।
बीमारी से जूझते और मौत से लड़ते हुए ज़िंदगी वापस पाने के उस दौर में, झेंगहुआ यांग ने 'लीग ऑफ लेजेंड्स', 'माइनक्राफ्ट' और 'वर्ल्ड ऑफ वॉरक्राफ्ट' जैसे वीडियो गेम खेलकर सुकून पाया। गेम खेलने के साथ-साथ, उन्होंने अपने खुद के गेम बनाने की इच्छा जताई जो लोगों को अलग तरह से महसूस करा सकें और सोचने पर मजबूर कर सकें। इसके बाद, उन्होंने 1,000 डॉलर का निवेश करके 'सेरेनिटी फोर्ज' की स्थापना की, और आज यह कंपनी 10 मिलियन डॉलर (90 करोड़ रुपये) के गेमिंग साम्राज्य में बदल गई है।
झेंगहुआ यांग कहते हैं कि लोगों की मदद करने वाले गेम बनाने के विचार ने ही उन्हें गेमिंग की दुनिया में खींचा। बीमारी से ठीक होने के बाद, उन्होंने कोलोराडो बोल्डर यूनिवर्सिटी लौटकर बिजनेस की पढ़ाई शुरू की। इसके बाद, उन्होंने ऐसे गेम बनाने की कोशिश जारी रखी जो लोगों को गहराई से और अलग तरह से सोचने पर मजबूर करें। आज, 'सेरेनिटी फोर्ज' में 40 से ज़्यादा कर्मचारी हैं और कंपनी ने 'लाइफलेस प्लैनेट' और 'डोकी डोकी लिटरेचर क्लब' समेत लगभग 70 गेम जारी किए हैं। कंपनी हर साल 10 से 15 मिलियन डॉलर कमाती है।
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