Mehul Choksi भारत कैसे आएगा? जानिए प्रत्यर्पण कानून की वो 5 बातें जो भगोड़ों को देश लाने का देता है अधिकार

Published : Apr 14, 2025, 12:22 PM IST

Mehul Choksi: पीएनबी घोटाले का मुख्य आरोपी मेहुल चोकसी बेल्जियम में अरेस्ट हो गया है। वह कभी एंटीगुआ तो कभी डोमिनिका में छिपकर बच रहा था। अब  प्रत्यर्पण कानून के तहत वह भारत लाया जा रहा है। आइए जानते हैं इस कानून के बारे में 5 खास बातें। 

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क्या है प्रत्यर्पण कानून?

प्रत्यपर्ण कानून एक से दूसरे देश में किसी भगोेड़े को आधिकारिक रूप से सुपुर्दगी का अधिकार देता है। जिस व्यक्ति पर अपराध का आरोप होता है, उसे उसी देश को सौंपा जाता है, जिस देश में उस पर दोष सिद्ध हुआ हो। कोई भी देश किसी दूसरे देश से ऐसे व्यक्ति को प्रत्यर्पित करने के लिए अनुरोध कर सकता है। यह कानून जांच के अधीन, विचाराधीन या दोषी पाए गए अपराधियों पर लागू होता है।

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भारत का प्रत्यर्पण कानून क्या है?

भारत का प्रत्यर्पण अधिनियम 1962 वो कानून है, जो भगोड़ों को देश में वापस लाने का अधिकार देता है। विदेश मंत्रालय का प्रत्यर्पण डेस्क सारी जरूरी कार्रवाई करता है। मतलब एमईए का कांसुलर डिवीजन पूरा केस तैयार करता है। भारत ने यूएसए, यूके और बांग्लादेश आदि देशों से प्रत्यर्पण संधि की है।

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प्रत्यर्पण अपराध क्या है?

प्रत्यर्पण संधि या समझौता वह कानून है, जिसमें किसी विदेशी देश के संबंध मेें प्रत्यर्पण अपराध संधि में इस संबंध में कंडीशन निर्धारित की जाती हैं। वैसे यदि किसी व्यक्ति पर भारतीय कानून या किसी अन्य देश के कानून के हिसाब से कम से कम एक साल कैद की सजा का प्रावधान हो, उस पर भी प्रत्यर्पण संधि लागू होती है।

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भारत में कौन संभालता है प्रत्यर्पण से जुड़े काम?

भारत में प्रत्यर्पण अधिनियम को प्रसारित करने की जिम्मेदारी विदेश मंत्रालय के कांसुलर, पासपोर्ट और वीजा प्रभाग की होती है। वही प्रत्यर्पण अनुरोधों पर काम करता है। विदेश मंत्रालय के द्वारा ही भारत प्रत्यर्पण के अनुरोध दूसरे देशों को भेज सकता है। भारत के कानून के मुताबिक, जनता के किसी व्यक्ति द्वारा अनुरोध किए जाने पर प्रत्यर्पण संभव नहीं है। यह कानून प्रॉपर चैनल ही काम करता है।

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किन देशों से भारत प्रत्यर्पण का अनुरोध करने में सक्षम?

जिन देशों के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि है, उन देशों की जिम्मेदारी बनती है कि वह हमारे प्रत्यर्पण अनुरोध पर विचार करे। पर यदि किसी देश के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि नहीं है तो वह विदेशी देश अपने घरेलू कानूनों और प्रोसीजर के तहत भारत के अनुरोध पर विचार करेगा। जरूरत पड़ने पर भारत प्रत्यर्पण के लिए अनुरोध करने से पहले ही ​किसी विदेशी देश से अपराधी की अरेस्टिंग का अनुरोध कर सकता है। यह तब किया जाता है, जब उस अपराधी के संबंधित विदेशी देश से भागने की संभावना हो।

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