
ITR Filing for Deceased Person : क्या आप जानते हैं, मृत व्यक्ति का भी इनकम टैक्स रिटर्न भरना पड़ता है? सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन भारत में अगर किसी की मौत हो जाती है और उसकी इनकम टैक्सेबल है, तो उसका आईटीआर भरना कानूनी रूप से जरूरी है। इस स्थिति में उसके कानूनी वारिस (Legal Heir) को उसकी तरफ से ITR भरना होता है। इसके लिए कानूनी वारिस को इनकम टैक्स पोर्टल पर रजिस्टर करना पड़ता है और फिर मृतक की आय के अनुसार टैक्स कैलकुलेट करके फाइल करनी होती है। इस आर्टिकल में हम स्टेप-बाय-स्टेप पूरी प्रॉसेस, जरूरी डॉक्यूमेंट्स और टैक्स लायबिलिटी की लिमिट बताएंगे, जिससे आसानी से मृत व्यक्ति का ITR भर सकते हैं।
कानूनी वारिस वह होता है जो किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसकी संपत्ति और हक का मालिक बनता है। इसे साबित करने के लिए कुछ डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होती है। जिसमें कोर्ट से जारी लीगल हेयरशिप सर्टिफिकेट (Legal Heirship Certificate), स्थानीय राजस्व अधिकारी से जारी प्रमाण पत्र, नगरपालिका या नगरपालिका परिषद से जारी जीवित परिवार के सदस्यों का प्रमाण पत्र (Surviving Family Members Certificate), मृतक की रजिस्टर्ड वसीयत (Will), राज्य-केंद्र सरकार का फैमिली पेंशन सर्टिफिकेट (Family Pension Certificate) शामिल होता है। इस बात का ध्यान रखें कि कई बार ये सर्टिफिकेट्स लोकल लैंग्वेज में होते हैं, इन्हें इंग्लिश या हिंदी में ट्रांसलेट करके नोटरी से वैरिफाई भी कराना होता है।
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कानूनी वारिस की देनदारी सिर्फ उतनी होगी जितनी संपत्ति उन्होंने विरासत में पाई है। जैसे अगर विरासत में 8 लाख रुपए मिले और टैक्स बकाया 9.5 लाख रुपए है, तो अधिकतम 8 लाख रुपए ही चुकाने होंगे। मृतक के बकाया टैक्स पर पेनल्टी या ब्याज भी वारिस को भरना पड़ सकता है, लेकिन यह भी संपत्ति की वैल्यू तक सीमित होगा।
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