चीन का कमाल: हमारा ही आम हमें ही निर्यात कर रहा ड्रैगन

Published : Aug 19, 2024, 10:32 AM IST
चीन का कमाल: हमारा ही आम हमें ही निर्यात कर रहा ड्रैगन

सार

दुनिया में सबसे ज़्यादा आम उगाने और निर्यात करने वाले देशों में से एक भारत को अब चीन ने टक्कर देना शुरू कर दिया है। कुछ दशक पहले तक आम की खेती से अनजान चीन, अब आम के निर्यात में भारत से आगे निकल गया है।

नई दिल्ली: दुनिया में सबसे ज़्यादा आम उगाने और निर्यात करने वाले देशों में से एक भारत को अब चीन ने टक्कर देना शुरू कर दिया है। कुछ दशक पहले तक आम की खेती से अनजान चीन, अब आम के निर्यात में भारत से आगे निकल गया है। यही नहीं, चीन अब भारत के ही देसी आमों को उगाकर भारत को निर्यात कर रहा है। इसके अलावा, चीन भारत के निर्यात की जाने वाली आम की किस्मों को उगाकर भारत के निर्यात को बड़ा झटका दे रहा है। हैरानी की बात यह है कि दशकों पहले आम की कूटनीति शुरू करने वाले भारत को ही चीन आम के निर्यात के ज़रिए झटका दे रहा है।

उत्पादन में नंबर 1
भारत दुनिया के आम उत्पादन में 40% हिस्सेदारी के साथ दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। भारत में हर साल 2.5 करोड़ टन से ज़्यादा आम उगाए जाते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों से निर्यात के मामले में चीन से पिछड़ गया है। चीन ने 2023 में 514 करोड़ रुपये के आम का निर्यात किया। भारत ने इसी दौरान 498 करोड़ रुपये के आम का निर्यात किया। यह चीन से 6.24% कम है। 2022 में भी ऐसा ही हुआ था। तब चीन ने 465 करोड़ रुपये के आम का निर्यात किया था जबकि भारत ने सिर्फ़ 380 करोड़ रुपये के आम ही विदेशों को भेजे थे। 2022 की तुलना में 2023 में भारत का निर्यात थोड़ा सुधरा है।

 

निर्यात में भारत को पछाड़ा चीन ने
1960 तक चीन में आम की खेती लोकप्रिय नहीं थी। लेकिन हैनान और ग्वांगडोंग जैसे कुछ प्रांतों में बाद में आम की खेती लोकप्रिय हुई और आज यह एक बड़े उद्योग का रूप ले चुकी है। आज दशहरी, चौसा, अल्फांसो (आपूस), तोतापुरी, लंगड़ा जैसी भारत की निर्यात की जाने वाली किस्मों को चीन बड़े पैमाने पर उगा रहा है। ख़ास बात यह है कि ये भारत की मूल किस्में हैं, लेकिन इनमें से कुछ किस्मों के आमों को चीन भारत को ही निर्यात कर रहा है।

निर्यात में भारत पिछड़ा क्यों?
भारत में आम की घरेलू मांग बहुत ज़्यादा है। यह निर्यात के लिए पहली बाधा है। दूसरी बड़ी बाधा है रसायनों और प्रतिबंधित कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के आम व्यापारी शाहिद खान कहते हैं कि इन चीज़ों के इस्तेमाल की वजह से आम आयात करने वाले देश भारत के आमों को नकार कर चीन और दूसरे देशों के आमों को चुन रहे हैं।

 

नेहरू ने शुरू की थी आम कूटनीति
1950 के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भारत की आम कूटनीति शुरू की थी। इसके तहत दिल्ली से चीन को 8 आम के पौधे उपहार स्वरूप तत्कालीन चीनी प्रधानमंत्री झोउ एनलाई को भेजे गए थे। उपहार में दशहरी किस्म के 3 पौधे, चौसा और अल्फांसो के 2-2 और 1 लंगड़ा का पौधा शामिल था।

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