
Gold-Silver Prices: सोना और चांदी में पिछले कुछ महीनों से जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। दोनों ही धातुएं भारतीय बाजार में नए-नए रिकॉर्ड छू रही हैं। पिछले चार साल में सोने ने निवेशकों को तगड़ा रिटर्न दिया है। घरेलू बाजार में गोल्ड की कीमतों में 152% से ज्यादा की ग्रोथ देखने को मिलने है, जो बाकी दूसरी एसेट्स की तुलना में कहीं आगे है। इस दौरान चांदी की कीमतों में भी शानदार तेजी देखने को मिली है। दोनों ही धातुओं के जबर्दस्त रिटर्न के बावजूद, निवेशकों के मन में अक्सर जो सवाल आता है, वो ये है कि क्या सोने-चांदी में इन्वेस्ट करने का ये सही समय है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि शॉर्ट टर्म में भले ही सोने-चांदी की कीमतों में 2 से 5 प्रतिशत का उतार-चढ़ाव देखने को मिले, लेकिन हर गिरावट को एक अवसर के रूप में देखना चाहिए। लॉन्ग टर्म में दोनों ही कीमती धातुएं निवेशकों को अच्छा रिटर्न दे सकती हैं। मेटल्स फोकस के फिलिप न्यूमैन के मुताबिक, सोना-चांदी में मजबूती जारी रहेगी और इस साल के आखिर और 2026 तक गोल्ड नई ऊंचाइयों को छुएगा।
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जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के चेयरमैन किरीट भंसाली के मुताबिक, निवेशकों को आखिरी मिनट तक इंतजार करने के बजाय दिवाली से पहले सोना खरीदने पर विचार करना चाहिए। बाजार की मौजूदा स्थिति और दुनिया भर में जियो-पॉलिटिकल प्रेशर को देखते हुए कीमतों में कोई बड़ा बदलाव आना लगभग नामुमकिन लगता है। सोने की कीमतें महीने-दर-महीने बढ़ती रहेंगी।
1- जियो-पॉलिटिकल टेंशन
सोने-चांदी में निवेश एक सेफ इन्वेस्टमेंट है। दुनियाभर में चल रही पॉलिटिकल टेंशन, बाजार में उथल-पुथल और आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद सोना निवेश के लिए सबसे सुरक्षित ऑप्शन है। संकट के समय निवेशक आमतौर पर धन की सुरक्षा के लिए सोने की ओर आकर्षित होते हैं, जिससे यह फाइनेंशियल सिक्योरिटी का एक भरोसेमंद टूल बन जाता है।
2- फेडरल रिजर्व बैंक की चिंता
फ़ेडरल रिज़र्व बैंक ग्लोबल इकोनॉमी में सबसे असरदार अथॉरिटीज में से एक है। इसके फैसलों का पूरी दुनिया में बड़ा असर देखा जाता है। हालांकि, फेड के चेयरमैन जेरोम पॉवेल और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच हालिया तनाव ने फेड की विश्वसनीयता और आजादी को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस अनिश्चितता ने निवेशकों को संभावित महंगाई और करंसी रिस्क से बचने के लिए सुरक्षित निवेश के रूप में सोने-चांदी में निवेश के लिए प्रेरित किया है।
3- बढ़ती इंडस्ट्रियल डिमांड
पिछले कुछ दिनों में सोने-चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिसका मुख्य कारण सौर पैनलों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और इलेक्ट्रिक वाहनों में ग्रीन टेक्नोलॉजी में उनकी अहम भूमिका है। रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर्स में बढ़ते इस्तेमाल और सप्लाई की कमी ने भी सोने-चांदी की कीमतों में इजाफा किया है।
4- डॉलर की कमजोरी
सोने-चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी की एक वजह अमेरिकी डॉलर में निवेशकों का घटता भरोसा भी है। जब भी डॉलर कमजोर होता है तो सोने -चांदी की कीमतें आमतौर पर बढ़ जाती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कमजोर डॉलर इन धातुओं को अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए ज्यादा सस्ता और आकर्षक बनाता है।
5- केंद्रीय बैंकों की खरीदारी
दुनियाभर के तमाम देशों के केंद्रीय बैंक जब भी सोने में निवेश बढ़ाते हैं तो लॉन्गटर्म में इसकी डिमांड बढ़ जाती है। सोने की ज्यादा खरीद की वजह से इसकी सप्लाई भी कम हो पाती है, जिससे कीमतों में उछाल आता है। बता दें कि फिलहाल 24 कैरेट शुद्ध सेना 1.17 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के आसपास है। वहीं, चांदी 1,45,610 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है।
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