Search My Child Initiative. जिस परिवार के मासूम बच्चे खो जाते हैं, अक्सर वह माता-पिता पुलिस प्रशासन के चक्कर काटते-काटते दुनिया से विदा हो जाते हैं। लेकिन जिनके खोए बच्चे वापस मिल जाते हैं, उनकी खुशी का कोई पैरामीटर नहीं होता, यह हर मां-बाप के लिए जिंदगी का सबसे खुशी वाला पल होता है। कई मां-बाप ऐसे ही हैं तो बच्चों की आस में दिन रात आंसू बहाते हैं। ऐसे ही परिवारों की मदद का बीड़ा कुसुम कांडवाल भट्ट ने उठाया और इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर गुमशुदा बच्चों की तलाश करने में जुट गईं।
कौन हैं कुसुम कांडवाल भट्ट और क्या करती हैं
कुसुम कांडवाल भट्ट का जन्म महाराष्ट्र के नासिक में हुआ। कुरूक्षेत्र यूनिवर्सिटी से कुसुम ने इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी में एमएससी किया और शादी के बाद दिल्ली शिफ्ट हो गईं। इनके पति विनोद भट्ट पारिवारिक बिजनेस संभालते हैं। कुसुम के दो बेटे भी हैं। कुसुम ने गुमशुदा बच्चों की तलाश के लिए एक संस्था बनाई जिसका नाम है सर्च माय चाइल्ड। यह संस्था कैसे अस्तित्व में इसके पीछे भी दिलचस्प कहानी है।
कैसे शुरू हुआ बच्चों की तलाश का अभियान
साल 2016 की बात है, नोएडा से एक बच्ची गायब हो जाती है। पुलिस ने काफी कोशिश की लेकिन बच्ची को नहीं ढूंढ पाए। कुसुम जब बच्ची को ढ़ूंढ रही थी तभी एक बच्चा भी गायब हो, जिसकी मां ने कुसुम से संपर्क किया। कुसुम ने मना कर दिया तो महिला रोने लगी। महिला के आंसुओं ने कुसुम को झकझोर दिया और वह पूरी रात नहीं सो पाईं। सुबह कुसुम ने फैसला किया कि अब वे अपना पूरा वक्त गुमशुदा बच्चों को खोजने में लगाएंगी।
कुसुम ने किया पूरा होमवर्क
सर्च माय चाइल्ड अभियान के लिए कुसुम ने पूरी तैयारी की और होमवर्क किया। उन्होंन सूचनाएं जुटाईं और रिसर्च किया। कुसुम ने गुमशुदा बच्चों के लिए सरकार से फोर्स के गठन की मांग की और पूर्व सीएम उत्तराखंड तीरथ सिंह रावत ने लोकसभा में भी यह डिमांड रखी। कुसुम लगातार यह काम कर रही हैं क्योंकि वे जानती है कि बच्चों को अगवा करने के बाद बेच दिया जाता है। या तो वे भीख मांगते या फिर उन्हें मारकर उन्हें बॉडी पार्ट्स बेचे जाते हैं।
लोगों की जागरूक कर रहीं कुसुम
कुसुम ने बताया कि वह दिल्ली के सैकड़ों स्कूलों तक पहुंची और अवेयरनेस कैंपेन चलाया। वे लगातार यह बच्चों और उनके परिवार वालों को अवेयर कर रही हैं ताकि लोगों को पता चल सके कि कैसे बचाव करना है। उन्होंने कहा कि मुझे इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ने का दुख इसलिए नहीं है क्योंकि जब एक मां-बाप के चेहरे पर खुशी दिखती है तो वह अनमोल होती है।
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