
Retail inflation raised: भारत में महंगाई डायन बढ़ती ही जा रही है। सब्जियों की आसमान चूमती कीमतों और खराब मौसम की वजह से फसलों पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव ने महंगाई दर को बढ़ा दी है। देश में रिटेल महंगाई इस साल के अपने चरम स्थिति पर है। महंगाई 3.65 प्रतिशत से बढ़कर 5.49 प्रतिशत के अपने हाईएस्ट लेवल पर पहुंच गई है। देश की खाद्य महंगाई दर 9.24 प्रतिशत तक पहुंच गई है। एक महीना पहले यह 5.66 प्रतिशत थी।
शहरी ही नहीं ग्रामीण लेवल पर भी महंगाई की मार
शहर और ग्रामीण महंगााई भी तेजी से बढ़ी है। यह भी अपने एक साल के सबसे उच्चतम लेवल पर है। शहरी महंगाई भी महीने-दर-महीने आधार पर तेजी से बढ़ रही है। अगस्त महीना में यह 3.14% थी लेकिन अब बढ़कर 5.05% हो गई है। ग्रामीण महंगाई 4.16% से बढ़कर 5.87% पर पहुंच गई है।
महंगाई कैसे बढ़ती है?
महंगाई का सबसे सीधा संबंध खरीदी की शक्ति यानी परचेसिंग पॉवर से है। जैसे अगर महंगाई की दर 7 प्रतिशत है तो अगर आप 100 रुपये कमा रहे तो उसका मूल्य सिर्फ 93 रुपये होगा। ऐसे में आप कहीं निवेश कर रहे हैं तो महंगाई अधिक होने पर आपके पैसे की वैल्यू कम हो जाएगी। महंगाई का बढ़ना और घटना, प्रोडक्ट्स की डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास अधिक पैसा होगा तो वह खरीदारी अधिक करेंगे। ऐसे में चीजों की डिमांड बढ़ेगी और डिमांड अधिक होने पर सप्लाई कम हुई तो कीमतें बढ़नी है। और फिर बाजार महंगाई की चपेट में आ जाएगा। यानी डिमांड अधिक और सप्लाई कम होने पर महंगाई बढ़ती है। धन का अधिक प्रभाव और प्रोडक्ट्स का बाजार में शॉर्टेज ही महंगाई को बढ़ाता है। अगर डिमांड कम होगी या सप्लाई अधिक है तो महंगाई कम होगी। अर्थशास्त्रियों की मानें तो रिटेल महंगाई को तय करने में करीब 300 सामान हैं जिनकी कीमतों से तय की जाती है।
यह भी पढ़ें:
क्या पैन कार्ड की भी एक्सपायरी डेट होती है? PAN CARD से जुड़ी सभी IMP जानकारी
व्यापार समाचार: Read latest business news in Hindi, Investment News, Insurance News, Personal Finance Tips & Budget News Live Updates at Asianet Hindi News