
Inflation Rate in Aril 2024: महंगाई से आम जनता परेशान है। हालांकि, इसी बीच एक अच्छी खबर है। अप्रैल में खुदरा महंगाई दर घटकर 4.83% पर आ गई है। बता दें कि ये पिछले 11 महीने में महंगाई का निचला स्तर है। इससे पहले जून, 2023 में यह 4.81% पर थी। हालांकि अप्रैल महीने में खाने-पीने की चीजें महंगी हुई हैं।
जानें एक महीने पहले कितनी थी महंगाई दर?
एक महीने पहले यानी मार्च 2024 में महंगाई दर 4.85% के लेवल पर थी। वित्त वर्ष 2023-24 में रिटेल महंगाई दर अप्रैल में 4.70 प्रतिशत, मई में 4.25 प्रतिशत, जून में 4.81 प्रतिशत, जुलाई में 7.44 प्रतिशत, अगस्त में 6.83 प्रतिशत, सितंबर में 5.02 प्रतिशत, अक्टूबर में 4.87 प्रतिशत, नवंबर में 5.55 प्रतिशत, दिसंबर में 5.69 प्रतिशत, जनवरी में 5.10 प्रतिशत, फरवरी में 5.09 प्रतिशत और मार्च 2024 में 4.85 प्रतिशत थी।
आखिर क्यों बढ़ती है महंगाई?
महंगाई के बढ़ने या घटने पर किसी भी उत्पाद की डिमांड और सप्लाई का फॉर्मूला लागू होता है। साथ ही बाजार में जब लिक्विडिटी (नगद पैसा) ज्यादा होगा तो वे ज्यादा से ज्यादा चीजें खरीदेंगे। ज्यादा चीजों के खरीदने से प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ती है। जब डिमांड ज्यादा हो जाती है और उसके अनुपात में उस चीज की सप्लाई नहीं हो पाती तो कीमतें बढ़ती हैं, जिससे महंगाई भी बढ़ती है। इसी तरह, जब डिमांड कम हो जाती है और सप्लाई बढ़ जाती है तो उस चीज की कीमत यानी महंगाई कम हो जाती है।
RBI करता है महंगाई कंट्रोल करने के उपाय
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया महंगाई को काबू में करने के लिए बाजार से अतिरिक्त तरलता यानी लिक्विडिटी को सोख लेता है। इसके लिए RBI समय-समय पर मौद्रिक नीति की समीक्षा करता है, जिसमें रेपो रेट (Repo Rate) बढ़ा देता है। रेपो रेट बढ़ने से बैंकों को लोन महंगा मिलता है, जिससे वो भी लोन की ब्याज दरें बढ़ा देते हैं। ऐसे में मार्केट में कैश सीमित मात्रा में हो जाता है, जिससे महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलती है।
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