भारत की रेटिंग में सुधार: S&P Global ने ‘BBB-’ से बढ़ाकर ‘BBB’ किया अपग्रेड, इन्वेस्टर्स के भरोसे में इज़ाफा

Published : Aug 14, 2025, 06:09 PM IST
S&P Global rating

सार

S&P Global Ratings ने भारत की क्रेडिट रेटिंग अपग्रेड कर ‘BBB-’ से ‘BBB’ की। जानें इसका निवेशकों, रुपये और सरकारी कर्ज पर क्या असर पड़ेगा और किन कारणों से यह सुधार हुआ।

S&P Global Ratings: भारत को ग्लोबल फाइनेंस से बड़ा तोहफ़ा मिला है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत की लांग टर्म सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग (Long-term Sovereign Credit Rating) ‘BBB-’ से बढ़ाकर ‘BBB’ कर दी है जबकि आउटलुक ‘स्टेबल’ (Stable Outlook) रखा गया है। साथ ही शॉर्ट-टर्म रेटिंग (Short-term Rating) भी ‘A-3’ से बढ़कर ‘A-2’ हो गई है। इसका मतलब है कि भारत अब ग्लोबल निवेशकों की नजर में और सुरक्षित इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बन गया है।

क्रेडिट रेटिंग को ऐसे समझें

क्रेडिट रेटिंग किसी देश का आर्थिक रिपोर्ट कार्ड है। जैसे बैंक लोन देने से पहले आपका क्रेडिट स्कोर देखते हैं, वैसे ही ग्लोबल इन्वेस्टर्स किसी देश में निवेश करने से पहले उसकी क्रेडिट रेटिंग देखते हैं।

  • AAA: सबसे भरोसेमंद, बेहद सुरक्षित
  • A से AA: मजबूत और स्थिर
  • BBB: सुरक्षित, लेकिन कुछ चुनौतियों के साथ
  • BB या नीचे: जोखिम भरा, जिसे जंक कहा जाता है
  • ‘BBB-’ से ‘BBB’ की छलांग का मतलब है कि भारत अब सुरक्षित श्रेणी में और ऊपर चढ़ गया है यानी निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।

S&P ने क्यों बढ़ाई भारत की रेटिंग?

तेज़ आर्थिक विकास: FY22 से FY24 के बीच भारत की औसत GDP ग्रोथ 8.8% रही, जो एशिया-प्रशांत (Asia-Pacific) में सबसे तेज़ है। अगले तीन साल में यह लगभग 6.8% रहने का अनुमान है।

स्थिर नीतियां: वित्तीय अनुशासन (Fiscal Discipline), महंगाई नियंत्रण (Inflation Control) और लगातार सुधार (Reforms) से निवेशकों को भरोसा मिला।

इंफ्रास्ट्रक्चर बूम: सड़कों, रेल और कैपिटल प्रोजेक्ट्स पर बड़े निवेश-सरकारी कैपेक्स अब GDP का करीब 5.5% है।

बेहतर वित्तीय स्थिति: बजट घाटा (Budget Deficit) अभी ऊंचा है, लेकिन आने वाले वर्षों में घटने की संभावना है।

इस अपग्रेड का मतलब क्या है भारत के लिए?

  • विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, FDI और FPI में इज़ाफा संभव।
  • भारत सरकार को ग्लोबल मार्केट में सस्ते कर्ज (Cheaper Loans) मिल सकते हैं।
  • रुपये (Rupee) को स्थिरता और मजबूती मिल सकती है।

चुनौतियां अभी भी बाकी

S&P ने चेताया है कि सरकारी कर्ज (Government Debt) और वित्तीय घाटा अभी भी ऊंचा है। साथ ही, प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम है। अगर आर्थिक विकास दर धीमी हुई या वित्तीय अनुशासन बिगड़ा तो रेटिंग पर दबाव आ सकता है।

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