
बिजनेस डेस्क : सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय (Subrata Roy) का नाम देश के सबसे बड़े कारोबारियों में से एक था। सहारा इंडिया परिवार की स्थापना कर वे काफी मशहूर हो गए थे लेकिन निवेशकों का पैसा न लौटाने को लेकर कानूनी विवादों में फंस गए और जेल तक जाना पड़ा। नौबत यहां तक आ गई कि कानूनी पचड़े से बचने के लिए उनकी फैमिली को भारत की नागरिकता तक छोड़नी पड़ी। अभी सुब्रत रॉय की पत्नी स्वप्ना रॉय (Swapna Roy) और बेटे सुशांतो रॉय (Sushanto Roy) यूरोपीय देश रिपब्लिक ऑफ मैसेडोनिया (Macedonia) की नागरिकता ले चुके हैं।
सुब्रत रॉय की फैमिली ने क्यों छोड़ी भारत की नागरिकता
सुब्रत रॉय की पत्नी स्वप्ना रॉय और बेटे सुशांतो रॉय की नागरिकता पर सहारा की तरफ से अब तक कुछ भी खुलकर नहीं कहा जाता है। हालांकि, रिपोर्ट्स के अनुसार, सहारा ग्रुप ने मेसेडोनिया में तीन बिजनेस खोलने का प्लान बनाया था। वहां डेरी, सेवन स्टार होटल और फिल्म प्रोडक्शन के कारोबार करने की योजना थी। नागरिकता की वजह से कंपनी को टैक्स लाभ और कई फायदे होते हैं। वहां की नागरिकता भी काफी सस्ती है।
मैसेडोनिया और सुब्रत रॉय
सुब्रत रॉय और मैसेडोनिया के बीच अच्छी तालमेल रही थी। उन्हें कई बार वहां राजकीय अतिथि बनने का भी अवसर मिला था। सुब्रत रॉय ने ही मैसेडोनिया में मदर टेरेसा का एक स्टेचू बनाने का प्रस्ताव रखा था। वे लास वेगास की तरह वहां भी एक स्वांक कसीनो बनाना चाहते थे। बता दें कि मैसेडोनिया युगोस्लाविया से अलग होकर 1991 में आजाद देश बना था और साल 1993 में संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों में शामिल हुए।
मेसेडोनिया में नागरिकता का नियम
दक्षिण पूर्वी यूरोप का देश मेसेडोनिया की नागरिकता सिर्फ 4 लाख यूरो के निवेश और 10 लोगों को नौकरी देकर मिल जाती है। इतना ही नहीं अगर किसी कारोबारी ने वहां रियल एस्टेट में 40,000 यूरो से ज्यादा का निवेश कर दिया तो एक साल तक मेसेडोनिया में रह सकता है। चूंकि, वहां बेरोजगारों की संख्या काफी ज्यादा है ऐसे में नागरिकता का नियम सरल बनाया गया है।
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