SEBI अपने पूर्व अध्यक्ष के बचाव में आयी, मुंबई कोर्ट ने माधवी पुरी पर फाइनेंशियल फ्रॉड का केस दर्ज करने का दिया है आदेश

Published : Mar 02, 2025, 07:53 PM IST
SEBI Chief Madhabi Puri Buch

सार

मुंबई की ACB कोर्ट ने SEBI के पूर्व प्रमुख माधबी पुरी बुच और अन्य अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया। SEBI ने इसे चुनौती देने का फैसला किया है। 

मुंबई: SEBI अपने पूर्व अध्यक्ष माधवी पुरी बुच का हर स्तर पर बचाव करने का ऐलान किया है। सेबी की पूर्व अध्यक्ष माधवी पुरी पर फाइनेंशियल फ्रॉड का आरोप लगा है। मुंबई स्पेशल कोर्ट ने उनके खिलाफ एफआईआर का आदेश दिया है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने रविवार को कहा कि वह मुंबई की एक विशेष अदालत के उस आदेश को चुनौती देगा जिसमें पूर्व SEBI प्रमुख माधबी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch), वर्तमान में कार्यरत तीन पूर्णकालिक सदस्य और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के दो अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की अनुमति दी गई है।

मुंबई कोर्ट ने क्यों माधवी पुरी पर एफआईआर का दिया आदेश?

मुंबई की विशेष एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) कोर्ट ने SEBI के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ कथित वित्तीय धोखाधड़ी (Financial Fraud), नियामकीय उल्लंघन (Regulatory Violations) और भ्रष्टाचार (Corruption) के आरोपों को देखते हुए एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

यह मामला ठाणे के एक कानूनी पत्रकार सापन श्रीवास्तव (Sapan Shrivastava) द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि SEBI अधिकारियों ने एक कंपनी "Cals Refineries Ltd" को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध (Listing) करने में मदद की जबकि यह नियामकीय मानकों को पूरा नहीं करती थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, SEBI अधिकारियों ने अपनी कानूनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं किया जिससे बाजार में हेरफेर और कॉर्पोरेट धोखाधड़ी संभव हुई।

SEBI कोर्ट के आदेश को देगी चुनौती

SEBI ने अपने बयान में कहा कि वह इस आदेश के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी। SEBI इस आदेश को चुनौती देने के लिए उचित कानूनी कदम उठाने का ऐलान किया। SEBI ने तर्क दिया कि जिन अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, वे घटना के समय इन पदों पर नहीं थे, फिर भी कोर्ट ने शिकायत पर बिना कोई नोटिस जारी किए या SEBI को अपना पक्ष रखने का मौका दिए एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दे दी।

1994 से जुड़ा मामला

यह कथित आर्थिक घोटाला 1994 का बताया जा रहा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि SEBI ने बिना SEBI अधिनियम, 1992, SEBI (ICDR) विनियम, 2018 और SEBI (LODR) विनियम, 2015 का पालन किए, कंपनी को सूचीबद्ध करने की मंजूरी दे दी।

कोर्ट का आदेश

कोर्ट ने प्रथम दृष्टया अपराध को संज्ञेय (Cognizable Offense) माना और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), वर्ली, मुंबई को FIR दर्ज करने और जांच शुरू करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह जांच की निगरानी करेगा और 30 दिनों के भीतर स्टेटस रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है।

SEBI का पलटवार

SEBI ने शिकायतकर्ता सापन श्रीवास्तव को फिजूल और आदतन याचिकाकर्ता करार दिया। SEBI ने कहा कि श्रीवास्तव द्वारा पहले भी इसी तरह की याचिकाएं दायर की गई थीं जिन्हें अदालत ने खारिज कर दिया था और कुछ मामलों में जुर्माना भी लगाया गया था।

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