
बिजनेस डेस्क। शेयर मार्केट में किसी स्टॉक और उसके गुणोत्तर क्रम में बढ़ने की ताकत क्या हो सकती है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि गांव के रहने वाले एक शख्स ने 10 हजार रुपए लगाकर 880 करोड़ की दौलत कमाई है। ये कहानी है महाराष्ट्र के जलगांव जिले में स्थित अमलनेर के रहने वाले एक साधारण से शख्स मोहम्मद अनवर अहमद की। किसान परिवार में पैदा हुए अनवर 4 भाई थे। चारों ही पिता के साथ खेत में काम करते थे। लेकिन 1980 में पिता की अचानक मौत के बाद चारों भाई ने फैसला किया कि पुश्तैनी जमीन बेचकर जो पैसा मिलेगा उसे बराबर-बराबर बांट लेंगे।
खेत बेचने के बाद मोहम्मद अनवर के हिस्से में 20 हजार रुपए आए। उस वक्त 27 साल के अनवर के दिमाग में इस पैसे को सही जगह इन्वेस्ट करने के ख्याल आ रहे थे। हालांकि, उन्हें ये समझ नहीं आ रहा था कि इसे कहां लगाया जाए। एक दिन अनवर गांव के पास ही एक चाय की टपरी पर बैठे थे। इसी दौरान सतीश शाह नाम का एक स्टॉक ब्रोकर, जो मुंबइ से उनके गांव आया था, वो भी उसी दुकान पर चाय पी रहा था। दरअसल, ये ब्रोकर गांव में इस बात का पता करने आया था कि क्या वहां किसी शख्स ने विप्रो कंपनी के शेयर खरीदे हैं। दरअसल, अमलनेर ही वो जगह है, जहां से विप्रो कंपनी की शुरुआत हुई।
विप्रो कंपनी के मुखिया अजीम प्रेमजी के पिता ने 1947 में अमलनेर गांव में ही अपना प्लांट लगाया था। उस समय गांव के बहुत सारे लोग कंपनी में काम करते थे और कुछ उसके शेयरहोल्डर भी थे। अब मुंबई से आए ब्रोकर ने बातों-बातों में मोहम्मद अनवर से भी बात की। चूंकि अनवर शेयर मार्केट में रुचि लेते थे, इसलिए उन्होंने विप्रो कंपनी और उसके शेयर से जुड़ी सारी जानकारी उससे पूछ ली।
ब्रोकर ने अनवर को बताया कि जब भी आप किसी कंपनी के शेयर खरीद लेते हैं, तो उस कंपनी में हिस्सेदार बन जाते हैं। इसके बाद मोहम्मद अनवर ने 1980 में ही विप्रो कंपनी के 100 शेयर 100 रुपए के हिसाब से खरीदे, जिसके लिए उन्होंने 10 हजार रुपए का निवेश किया। इसके साथ ही उन्होंने कुछ गांव वालों को भी शेयर दिलवाने में मदद की।
एक साल बाद यानी 1981 में विप्रो कंपनी ने 1:1 के अनुपात में बोनस शेयर डिक्लेयर किए। इसके बाद अनवर के पास शेयरों की संख्या बढ़कर 200 हो गई। 1985 में कंपनी ने दोबारा उसी अनुपात में बोनस शेयर बांटे और अब उनके पास विप्रो के 400 शेयर हो चुके थे। वहीं, 1986 में कंपनी ने हर एक शेयर को 10 रुपए के रेट पर स्पिलट कर दिया। ऐसे में उनके 400 शेयर अब 4000 हो गए।
इसके बाद 1987 में विप्रो ने एक बार फिर 1:1 के अनुपात में बोनस शेयर डिक्लेयर किए, जिससे मोहम्मद अनवर के पास शेयरों की संख्या बढ़कर 8000 हो गई। इसके बाद 1989 मे दोबारा इसी अनुपात में बोनस शेयर बांटे गए और उनके पास अब शेयरों की संख्या 16000 हो गई। कंपनी ने 1992, 1995 मे फिर इसी तरह बोनस बांटा और शेयर बढ़कर 64 हजार हो गए। 1997 में तो कंपनी ने 2:1 के अनुपात में बोनस दिया और शेयर अब 1,92,000 हो चुके थे।
1999 में 2 रुपए के हिसाब से शेयर स्पिलट कर दिया गया, जिससे अनवर के पास 9,60,000 शेयर हो गए। 2004 में 2:1 के अनुपात में और 2005 में 1:1 के अनुपात में बोनस से शेयरों की संख्या अब 57.60 लाख हो चुकी थी। इसी तरह, 2010 में 2:3 के अनुपात में बोनस शेयर के बाद उनके पास 96 लाख शेयर हो चुके थे। वहीं, 2017 में फिर 1:1 और 2019 में 1:3 अनुपात में बोनस के चलते उनके पास शेयरों की संख्या 2.56 करोड़ हो गई।
शुक्रवार 6 दिसंबर को विप्रो के शेयर की कीमत 297.35 रुपए थी। यानी इस लिहाज से मोहम्मद अनवर के पास रखे 2.96 करोड़ शेयरों की वैल्यू अब बढ़कर 880 करोड़ रुपए हो चुकी है। इसमें अगर डिविडेंड को जोड़ दिया जाए तो रकम इससे भी कहीं ज्यादा होती है, क्योंकि विप्रो कंपनी ने कई बार कैश के तौर पर उन्हें डिविडेंड दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें कंपनी से अब तक करीब 170 करोड़ का डिविडेंड मिल चुका है।
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