घर-घर बेचे मसाले, 15 LAKH कर्ज में डूबा..अब 3 कंपनियों से करोड़ों में खेल रहा ये बंदा

सार

Success Story:  सही वक्त और हिम्मत से लिया गया फैसला लोगों को कहां से कहां पहुंचा देता है। कभी वीडियो गेम  से लेकर मसाले बेचने तक, कई बिजनेस करने वाले शख्स ने कैसे खड़ी की करोड़ों की तीन कंपनियां। जानते हैं कामयाबी की कहानी। 

Businssman Success Story: लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती...ये पंक्तियां गोविंद भादु पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं, जिन्होंने अपनी जिंदगी में ट्यूशन पढ़ाने से लेकर घर-घर मसाले तक बेचे। यहां तक कि उनके ऊपर 15 लाख रुपए का कर्ज भी चढ़ गया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। जिंदगी में कुछ बड़ा करने के लालच में वो एक के बाद एक 5 बिजनेस करते गए, लेकिन हर बार नाकामयाबी मिली। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। फिलहाल गोविंद 3 कंपनियों के मालिक हैं, जिनका टर्नओवर 20 करोड़ रुपए है। जानते हैं उनकी सफलता की कहानी।

बिजनेस करना चाहता था, पर नहीं थे पैसे

राजस्थान के रहने वाले गोविंद भादु का जन्म बीकानेर से 100 KM दूर खाजूवाला नामक कस्बे में हुआ। एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले गोविंद के पिता किसान और मां हाउसवाइफ हैं। पैसों की जद्दोजहद में बचपन गुजारने वाले गोविंद शुरू से ही अपना बिजनेस करने के बारे में सोचते थे। हालांकि, उन्हें न तो कोई बताने वाला था और ना ही उनके पास इतने पैसे थे।

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वीडियोगेम देख आया बिजनेस आइडिया

गोविंद के मुताबिक, मैं एक बार अपने दोस्त के साथ वीडियोगेम खेलने गया। दोस्त खेलने लगा लेकिन मेरा दिमाग सोचता रहा कि ये अच्छा बिजनेस है। 1 घंटे के 10 रुपए मिलते थे। क्यों न इसी बिजनेस का शुरू करूं। इसके बाद मैंने एक पुराना वीडियो गेम खरीदा और 1 घंटे के 7 रुपए लेने लगा। इसके बाद मेरा ये बिजनेस चलने लगा। इस बिजनेस से मैंने कुछ सेविंग कर ली। इसके साथ ही मैंने कॉमिक्स का भी बिजनेस शुरू कर लिया।

12वीं के बाद खर्च निकालने पढ़ाई ट्यूशन

12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद गोविंद बीकानेर में रहकर कम्प्यूटर सीखने लगे। घरवाले फीस तो देते लेकिन पर्सनल खर्च नहीं देते थे। इसके लिए उन्होंन बच्चों को ट्यूशन पढ़ानी शुरू की। इससे उन्हें महीने के 1000 रुपए मिलने लगे। लेकिन मेरा दिमाग हमेशा कोई न कोई बिजनेस करने की सोचता रहा।

बॉर्डर पर शुरू किया STD-PCO का काम 

बीकानेर के खाजूवाला में बॉर्डर एरिया है। उस वक्त करगिल का युद्ध चल रहा था। वहां आर्मी थी। मेरे दिमाग में आइडिया आया क्यों न STD-PCO खोलूं। अपनी सेविंग के पैसों से मैंने एक पार्टनर के साथ मिलकर इस काम को शुरू किया। यहां 6 से 8 महीने में हमने 3 से 4 लाख रुपए कमा लिए। लेकिन मुझे लगा ये बिजनेस बहुत ज्यादा आगे नहीं बढ़ने वाला। मैं जो सपने देख रहा हूं, वो इससे नहीं पूरे होने वाले। इसके बाद मैंने पूरा बिजनेस अपने पार्टनर को सौंप दिया और वापिस बीकानेर आ गया।

मसाले बेचने का काम शुरू किया

STD के बिजनेस से मेरे पास 3-4 लाख रुपए आ गए थे। ऐसे में अब मैंने मसाले बेचने का काम शुरू किया। मैं फैक्ट्री से मसाला लेकर उसे पैक करता और दुकानदारों को बेचने जाता। इसमें सबसे बड़ी दिक्कत सुबह से शाम तक की मेहनत होती थी। कई बार पैसा समय पर नहीं मिलता और दो-तीन महीने अटक जाता था। लेकिन मैंने हार नहीं मानी और इसके बाद प्रिंटिंग का काम शुरू किया। कुछ दिन करने के बाद मैंने जीरे का बिजनेस किया। लेकिन हर काम एक लेवल पर जाकर सीमित हो जाता था। मुझे लगा मैं जो सपना देख रहा हूं, वो इन कामों से पूरे नहीं होंगे।

कंपनी बनाते ही हो गया बड़ा नुकसान

गोविंद के मुताबिक, इसके बाद मैंने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर एक कंपनी बनाई, जिसमें FMCG प्रोडक्ट की प्लानिंग की। हालांकि, इस बिजनेस को शुरू करने के लिए बड़ी पूंजी की जरूरत थी। इसके लिए मैंने पिताजी से बात कर खेती की जमीन पर 5 लाख रुपए लोन लिया। बाकी पैसा अपनी सेविंग और कुछ लोगों से उधारी लेकर लगा दिया। इस बिजनेस में पैसा लगाने के बाद मुझे लगा कि यही वो चीज है जो मैं चाहता था। हमारे पास 20 लोगों की टीम थी, बड़ा ऑफिस था। इस बिजनेस में भी हमारे सामने बहुत-सी चुनौतियां आने लगीं। खर्चे बढ़ रहे थे, कमाई घट रही थी। इसके बाद मैंने ये बिजनेस भी छोड़ दिया।

15 लाख का कर्ज, चुकाने का नहीं दिख रहा था कोई रास्ता

मैंने इस बिजनेस को तो छोड़ दिया, लेकिन मेरे ऊपर 15 लाख का कर्ज हो चुका था। कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। यहां तक कि मुझे अपने घर के राशन की भी चिंता होने लगी। मुझे इसके लिए अपनी बाइक तक बेचनी पड़ी। लोग मेरे घरवालों को कहने लगे कि तुम्हारा बेटा कुछ नहीं कर पाएगा। बिजनेस करना हर किसी के बस की बात नहीं। लोग मेरी गलतियां निकालने लगे। चारों तरफ नेगेटिव माहौल हो चुका था।

ईश्वर आपके साथ हो तो, रास्ता मिल ही जाता है..

लेकिन कहते हैं कि ईश्वर अगर आपसे रूठा नहीं है तो कोई न कोई रास्ता निकल ही आता है। मेरे पापा ने मुझे मोटिवेट करते हुए कहा- जब हम फसल बोते हैं तो उसकी पैदावार में 6 महीने का समय लगता है। हम उसमें पानी-खाद देते हैं और उस फसल की रक्षा करते हैं। कई बार अच्छी उपज होती है, कई बार नहीं होती। लेकिन क्या हम खेती करना छोड़ देते हैं? तुम फिर कोशिश करो और लगे रहो, सबकुछ ठीक होगा। मुझे पिताजी की बात से बहुत हौसला मिला।

अब 3 कंपनियों से 20 करोड़ का टर्नओवर 

2009 में इंडक्शन कुकर मार्केट में नया आया था। मैं इसे बड़े शहरों से होलसेल में मंगाने लगा और दुकानदार और पर्सनल लोगों को ये प्रोडक्ट बेचने लगा। धीरे-धीरे इसमें अच्छा मुनाफा होने लगा। उससे कॉन्फिडेंस आया। इसके बाद हेल्थ इक्विपमेंट की कुछ प्रोडक्ट्स जैसे बायोमैग्नेटिक थैरेपी की मार्केटिंग शुरू की। धीरे-धीरे ये बिजनेस भी चलने लगा। इसके बाद 2010 में दिल्ली में अपना ऑफिस खोला। अब हम इन प्रोडक्टस को पूरे भारत में सप्लाई करते हैं। 2014 में हमने अपने प्रोडक्ट्स को अमेजॉन, फ्लिपकार्ट पर भी लिस्ट किया और वहां से हमें अच्छा रेवेन्यू मिलने लगा। मेरा सारा कर्जा उतर चुका था। इसके बाद मैंने माइनिंग का भी एक बिजनेस शुरू किया। गोविंद के मुताबिक, अब मेरे 3 बिजनेस और 100 से ज्यादा लोगों की टीम है। हमारे 7 ब्रैंड्स हैं और 20 करोड़ का टर्नओवर है।

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