
Trump Tariff threat and India strategy: मोदी सरकार ने हाई कैपिसिटी वाली बाइक्स पर कस्टम ड्यूटी घटाने का फैसला किया है। भारत सरकार का यह फैसला उस वक्त आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार भारत, चीन, ब्राजील जैसे देशों को टैरिफ की धमकियां दे रहे हैं। हालांकि, बजट में कस्टम ड्यूटी कटौती का ऐलान करने के बाद यह भी स्पष्ट संकेत दिया है कि देश संरक्षणवाद (protectionism) की नीति नहीं अपना रहा है। वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी तुहिन कांता पांडे ने कहा कि सरकार की मंशा ग्लोबल ट्रेड के लिए सकारात्मक संकेत भेजने की है। लेकिन माना जा रहा है कि यह फैसला अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापार युद्ध (trade war) को लेकर आक्रामक रुख की वजह से हुआ है।
वित्त सचिव तुहिन कांता पांडे ने कहा: हम नहीं चाहते कि किसी को यह संकेत मिले कि भारत संरक्षणवादी नीति अपना रहा है। हमारा रुख यही है कि हम संरक्षण नहीं बढ़ाना चाहते।
भारत सरकार ने बजट में 1,600 सीसी या उससे अधिक क्षमता वाली पूरी तरह से निर्मित (fully built) मोटरसाइकिलों पर कस्टम ड्यूटी को 50% से घटाकर 30% कर दिया है। इस फैसले को अमेरिकी कंपनियों, खासतौर पर हार्ले डेविडसन जैसी कंपनियों के लिए एक राहत के रूप में देखा जा रहा है।
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने वाले हैं। इस मुलाकात में व्यापार और वीजा संबंधी मुद्दे प्रमुख रहेंगे।
अमेरिका लंबे समय से भारत पर ऊंचे टैरिफ (high tariffs) लगाने का आरोप लगाता रहा है। ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान भारत को टैरिफ अब्यूजर भी कहा था। ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में अमेरिका में रह रहे अवैध भारतीय प्रवासियों (undocumented Indians) का मुद्दा भी उठाया है, जिस पर भारत सरकार अमेरिका के साथ बातचीत कर रही है।
भारत सरकार का कहना है कि नए टैरिफ उपाय घरेलू कंपनियों को शुरुआत में मदद करेंगे, लेकिन जैसे-जैसे वे विकसित होंगे, ये शुल्क कम कर दिए जाएंगे। वित्त सचिव पांडे ने कहा: हमें दुनिया के साथ-साथ अपने उद्योग को भी सही संकेत देना चाहिए।
बजट में औसत टैरिफ स्तर को 13% से घटाकर 11% कर दिया गया है। इससे विदेशी कंपनियों को भारत में व्यापार करने में आसानी होगी, जिससे निवेश और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कनाडा, मैक्सिको और चीन के खिलाफ बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाए हैं, जिससे व्यापार युद्ध तेज हो गया है। हालांकि, इन फैसलों का सीधा असर भारत पर नहीं पड़ा लेकिन ट्रंप प्रशासन के कड़े रुख को देखते हुए भारत अपने व्यापारिक फैसलों को लेकर सतर्कता बरत रहा है। भारत की यह पहल यह भी दर्शाती है कि सरकार "मेक इन इंडिया" (Make in India) को बढ़ावा देने के साथ-साथ विदेशी निवेश को भी आकर्षित करना चाहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर (automobile sector) को दीर्घकालिक रूप से फायदा मिलेगा और देश की वैश्विक व्यापारिक साख भी मजबूत होगी।
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