
बिजनेस डेस्क : मार्च 2024 में थोक महंगाई दर बढ़कर 0.53% पर पहुंच गई है, जो पिछले तीन महीनों में उच्चतम स्तर है। फरवरी में थोक महंगाई 0.20 फीसदी और जनवरी में 0.27 फीसदी थी। खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से थोक महंगाई (WPI Inflation) में ये तेजी आई है। वाणिज्य मंत्रालय ने सोमवार,15 अप्रैल को डेटा जारी कर इसकी जानकारी दी है। बता दें कि एक साल पहले मार्च 2023 में थोक महंगाई दर 1.34% थी और अप्रैल 2023 में 0.92% थी।
मार्च में थोक महंगाई दर बढ़ने का कारण
मार्च 2024 में खाद्य महंगाई दर बढ़ी है। यह फरवरी की तुलना में 4.09% से बढ़कर 4.65% पर पहुंच गई। वहीं, डेली जरूरत के सामानों की महंगाई दर 4.49% से बढ़कर 4.51% पर पहुंच गई है। फ्यूल और पावर की थोक महंगाई दर में 1.59 की गिरावट हुई है, जो 0.77 पर थी। वहीं, मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई दर भी 1.27% की गिरावट के साथ 0.85 फीसदी पर पहुंची है।
रिटेल महंगाई में गिरावट
12 अप्रैल को जारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2024 में खुदरा महंगाई दर 10 महीने में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थी। खाने-पीने के सामान सस्ते होने से खुदरा महंगाई दर में गिरावट हुई। नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस की तरफ से ये आंकड़े जारी किए गए थे।
थोक महंगाई बढ़ने से आप पर क्या होगा असर
WPI (Wholesale price index) यानी थोक महंगाई दर अगर ज्यादा समय तक उच्चतम स्तर पर बनी रहती है तो उत्पादन पर इसका असर पड़ सकता है। ऐसा होने से कंज्यूमर्स पर बोझ बन सकता है। खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं। ऐसी कंडीशन में सरकार टैक्स कटौती से इसे कंट्रोल कर सकती है। जैसे- क्रूड ऑयल में तेजी के बाद सरकार एक्साइज ड्यूटी कम कर कटौती करती है। हालांकि, इस कटौती की भी एक सीमा होती है। थोक महंगाई इंडेक्स में केमिकल, प्लास्टिक, रबर और ज्यादा वेटेज मेटल से जुड़े सामान आते हैं।
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