
Post Office New Rule: पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाओं में पैसा लगाने वालों के लिए एक अहम प्रशासनिक बदलाव हुआ है। अब PPF, सुकन्या समृद्धि योजना और दूसरी बचत योजनाओं में ब्याज की रकम में सुधार किसी एक कर्मचारी की एंट्री से नहीं हो सकेगा। इसके लिए सरकार ने Maker-Checker सिस्टम लागू किया है, यानी ब्याज में बदलाव से पहले दो स्तर पर जांच जरूरी होगी।
नया सिस्टम पोस्ट ऑफिस की कई लोकप्रिय योजनाओं पर लागू होगा। इनमें PPF, Sukanya Samriddhi Yojana, Post Office Savings Account, MIS, SCSS और NSC शामिल हैं। अगर किसी खाते में तकनीकी या अन्य वजह से ब्याज की रकम गलत दर्ज हो गई है और उसमें सुधार करना जरूरी है, तो अब उसकी स्वतंत्र जांच होगी। इससे खातों में ब्याज की एंट्री से जुड़ी गलती या अनधिकृत बदलाव की संभावना कम करने का प्रयास किया गया है।
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पहले सक्षम अधिकारी की मंजूरी के बाद SBCO सुपरवाइजर सिस्टम में ब्याज सुधार की एंट्री कर सकता था। नए सिस्टम में Maker एंट्री करेगा, जबकि Checker उसकी दोबारा जांच और मंजूरी देगा। सबसे पहले हेड पोस्टमास्टर दस्तावेजों की जांच करेंगे। इसके बाद मामला डिविजनल हेड के पास जाएगा। मंजूरी मिलने पर हेड ऑफिस का SBCO सुपरवाइजर HIARM सिस्टम में एंट्री करेगा और सर्किल CPC सुपरवाइजर अंतिम जांच करेगा।
HIARM के जरिए एक बार में अधिकतम ₹5 लाख तक के ब्याज का एडजस्टमेंट किया जा सकेगा। इससे ज्यादा रकम होने पर मामला CPRC, चेन्नई भेजा जाएगा।
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह प्रक्रिया सिर्फ ब्याज की रकम सुधारने के लिए है। इससे खाते के मूलधन यानी Principal Amount में बदलाव नहीं किया जा सकता। SCSS और MIS में ब्याज सुधार के लिए BOD तारीख का नियम रहेगा, जबकि सेविंग्स अकाउंट में BOD या पिछले वित्त वर्ष की 31 मार्च की तारीख इस्तेमाल की जा सकेगी। कुल मिलाकर, नया सिस्टम ब्याज सुधार में अतिरिक्त जांच और जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश है।
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