
बिजनेस डेस्क: केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार के पास सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के दायरे में आने वाले 81 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को नौ महीनों तक खिलाने के लिए पर्याप्त अनाज का भंडार है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार गेहूं की भारी पैदावार की उम्मीद को देखते हुए हमारे पास आने वाले दिनों में और अधिक समय के लिए खाद्यान्न भंडार होगा।
कोराना वायरस महामारी की रोकथाम के लिए लागू प्रतिबंधों की अवधि को अप्रैल महीने के अंत तक बढ़ाये जाने की संभावना को देखते हुए उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के मंत्री ने कहा कि संकट के समय ‘अभूतपूर्व’ पैमाने पर खाद्यान्नों का परिवहन और उनका वितरण ‘जीवनरेखा’ बनकर उभरा है। इसी के जरिये गरीबों को समय पर उनके राशन की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
कुल मिलाकर 534.78 लाख टन अनाज उपलब्ध
पासवान ने कहा कि 10 अप्रैल तक सरकारी गोदामों में, गरीबों के बीच वितरण के लिए 299.45 लाख टन चावल और 235.33 लाख टन गेहूं जैसे दो प्रमुख अनाज उपलब्ध थे। यह कुल मिलाकर 534.78 लाख टन है। पासवान ने कहा कि प्रति माह पीडीएस के माध्यम से 60 लाख टन अनाज की आपूर्ति की जाती है। यहां से सीमित मात्रा में मोटे अनाज और दालों की आपूर्ति भी की जाती है।
गेहूं और चावल की कमी को लेकर कोई चिंता नहीं
उन्होंने कहा, ‘‘अनाज की कोई कमी नहीं है। हमारे पास अब रबी फसल आने वाली है और हमारा अनुमान है कि हमारे पास दो साल तक के लिए पर्याप्त स्टॉक होगा।’’ हालांकि लॉकडाउन को बढ़ाने के संदर्भ में अर्थव्यवस्था से लेकर कई तरह की चिंतायें हैं, लेकिन गेहूं और चावल जैसे आवश्यक अनाज की कमी को लेकर कोई चिंता नहीं है।
राज्य सरकारों को ये नसीहत
पासवान ने हल्के-फुल्के अंदाज में मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर कहा कि परिस्थिति कुछ ऐसी है कि ‘‘गवाह (केन्द्र सरकार) चुस्त और मुद्दई (राज्य सरकारें) सुस्त’’। उन्होंने कहा कि सभी पीडीएस लाभार्थियों को तीन महीने की आपूर्ति मुफ्त मिलने की घोषणा के बाद केंद्र सरकार लगातार राज्यों से कह रही है कि वे अपने राशन के कोटे का समय पर उठान करें।
अनाजों के आवागमन में ट्रेनें निभा रहीं महत्वपूर्ण भूमिका
उन्होंने कहा कि अनाजों के आवागमन में ट्रेनें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में किसी एक दिन ट्रेन के जरिये करीब 20.19 लाख टन अनाज को भेजा गया जो एक रिकॉर्ड है। सरकार ने एजेंसियों, सार्वजनिक हों या निजी दोनों के लिए भी यह आसान बना दिया है कि यदि वे गरीबों की मदद करने में शामिल हों, तो वे सरकार के पास से रियायती दर पर अनाज खरीद सकते हैं।
(फाइल फोटो)
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